कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पुलवामा घटना के बाद उन जवाबदारों का बयान पढ़ लेना चाहिए- जो कहते थे “मोदी प्रधानमंत्री होते तो लाहौर तक पहुंच गए होते”

आतंकवाद की घटनाओं और सीमा पर मारे जा रहे जवानों के आंकड़ों को देखें तो यह सरकार इस मामले में पूरी तरह विफल नज़र आ रही है.

एक तरफ़ जहां पूरा देश अपने जवानों के शहादत पर गमगीन है. वहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हैं. सत्ताधारी पार्टी भाजपा सुरक्षा में हुई चूक की समीक्षा करने के बजाय कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस देश की सुरक्षा के लिए मोदी सरकार के द्वारा किए गए वादे पर जवाब मांग रही है.

दरअसल, 2014 के आम चुनाव में मोदी सरकार जिन मुद्दों पर सवार होकर सत्ता में आई, उसमें आतंकवाद का मुद्दा भी प्रमुख था. यूपीए सरकार के समय हुए आतंकी हमले को लेकर कई बीजेपी नेताओं ने, ख़ुद प्रधानमंत्री ने भी केंद्र सरकार की कड़ी भर्त्सना की थी. इन घटनाओं के लिए पूरी तरह केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया था.

आज जब केंद्र में बीजेपी की सरकार है. मोदी प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हैं तो उन बयानों को फिर उलटने की ज़रूरत बन गई है. ताकि जवाबदार लोगों की नींद खुल सके.

8 जनवरी, 2013. जब पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा दो भारतीय सैनिकों के सिर काट दिए गए तो प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि “मैं देख रहा हूं कि पाकिस्तान भारतीय सैनिक का सर काट रहा है और हिंदूस्तान सर झुका रहा है. ऐसा मैंने कभी देखा नहीं. भारत को स्वाभिमान के साथ जीना होगा. इन वीर जवानों के लहू को बेकार नहीं जाने देना चाहिए. भारत इस प्रकार असहाय अनुभव करे. इसके लिए पूरी तरह केंद्र सरकार को जिम्मेवार ठहराता हूं. उनकी नीतियों को..उनके क्रियाकलापों को..देश उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगा.”

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इसी प्रकार 23 अप्रैल 2014 को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी कहा था कि “यदि मोदी प्रधानमंत्री बने तो पाकिस्तान के घुसपैठियों की सीमा पार करने की हिम्मत नहीं होगी”

6 अगस्त, 2013. पुंछ में आतंकियों द्वारा किए गए गोलीबारी में जब पांच भारतीय जवान शहीद हो जाते हैं तो वर्तमान विदेश मंत्री सुषमा स्वाराज ने तात्कालिन सरकार को कमजोर और दुविधा भरी सरकार बताया. उन्होंने कहा कि “देश और सेना को अपमान का सामना करना पड़ता है क्योंकि हमारे पास कमजोर और दुविधा भरी सरकार है.”

यही नहीं पुलवामा हमले पर चुप्पी साधने वाले भाजपाई नेताओं ने अजीबोग़रीब बयान दिए थे. पूंछ में हुए आतंकी हमले पर ही भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने कहा था कि “अगर आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होते तो हम लाहौर तक पहुँच गये होते.”

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद देश में आतंकवाद पर रोक लगाने के लिए नोटबंदी से सर्जिकल स्ट्राइक जैसे बड़े फ़ैसलों को सरकार की सफलता गिनाती है. जबकि आतंकवाद की घटनाओं और सीमा पर मारे जा रहे जवानों के आंकड़ों को देखें तो यह सरकार इस मामले में पूरी तरह विफल नज़र आ रही है. मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता और बढ़ गई है.

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