कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ओएनजीसी के कर्मचारी संघ ने कहा- मोदी सरकार ने एक अच्छी ख़ासी कंपनी को कर्ज़दार बना दिया

यूनियन ने भाजपा नेता संबित पात्रा को ओएनजीसी का स्वतंत्र निदेशक बनाए जाने का भी विरोध किया है।

मोदी सरकार सरकारी सेक्टर की कंपनियों का लगातार शोषण कर रही है। इसे लेकर तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के ट्रेड यूनियन ने प्रधानमंत्री मोदी को एक चिट्ठी लिखी है। कंपनी का कहना है कि सरकार अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए सरकारी फंड खर्च करने की बजाय पब्लिक सेक्टर से जबरदस्ती पैसे ले रही है। इसके साथ ही यूनियन ने भाजपा नेता संबित पात्रा को ओएनजीसी का स्वतंत्र निदेशक बनाए जाने का भी विरोध किया है।

प्रधानमंत्री मोदी के नाम 4 सितम्बर, 2018 को लिखे एक पत्र में कर्मचारी मज़दूर सभा ने मोदी सरकार पर कई महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में निजी लोगों को नियंत्रण प्रदान कर घोर पूंजीवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। पत्र में कहा गया है कि सरकार के ऐसे फ़ैसले राष्ट्रीय हितों के लिए गंभीर ख़तरा बन सकते हैं। चार पन्नों के इस पत्र में यूनियन ने मोदी सरकार के कई फ़ैसलों की तीख़ी आलोचना की है।

जीएसपीसी गैस ब्लॉक का अधिग्रहण

2016 में केंद्र सरकार ने ओएनजीसी पर दबाव डालकर उसे गुजरात राज्य बिजली निगम, जीएसपीसी का केजी बेसिन ब्लॉक अधिग्रहण करने को मज़बूर किया। इसके लिए ओएनजीसी ने जीएसपीसी को 8000 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।” पत्र में कहा गया है कि, “जीएसपीसी इस ब्लॉक में 2005 से ही शोधन का काम कर रही थी। करीब 10 साल तक विदेशी विशेषज्ञों और महंगे उपकरणों की खरीद पर करीब 20,000 करोड़ खर्च करने के बाद भी उसे इस बेसिन में गैस नहीं मिली, तो फिर सरकार ने क्यों जबरदस्ती 8000 करोड़ में ओएनजीसी को यह ब्लॉक खरीदने के लिए मजबूर किया?”

पत्र में लिखा गया है कि, “केंद्र सरकार के विभिन्न फैसलों ने ओएनजीसी की आर्थिक कमर तोड़कर रख दी है केंद्र सरकार ने ओएनजीसी के कामकाज में हस्तक्षेप कर सिर्फ जीएसपीसी को ही नहीं बचाया है, बल्कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम में सरकार की 51.11 फीसदी हिस्सेदारी 36,915 करोड़ में खरीदने के लिए भी मजबूर किया है। यह क़ीमत एचपीसीएल के बाजार मूल्य से 14 फ़ीसदी अधिक है। एचपीसीएल में हिस्सेदारी खरीदने के कारण ओएनजीसी लगभग 1,11,533 करोड़ रुपए का कर्जदार हो गया है।”

प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार ओएनजीसी के सीएसआर (सामाजिक दायित्व फंड) का लगातार दुरुपयोग कर रही है। अपनी कई योजनाओं में केंद्र सरकार ज़बर्दस्ती तरीके से ओएनजीसी का पैसा लगा रही है। कहा गया है कि केंद्र सरकार के मंत्री ओएनजीसी पर दबाव बनाकर पैसे खर्च करवा रहे हैं। यूनियन का कहना है कि एलपीजी कनेक्शन का वितरण हो या शौचालय का निर्माण, गांवों को गोद लेने की बात हो या लड़कियों के लिए सैनिट्री नैपकिन का वितरण सरकार हर जगह सरकारी फंड की बजाय ओएनजीसी का पैसा ख़र्च कर रही है।

मोदी की अगुवाई वाली सरकार के लगातार हस्तक्षेप ने धनी मनी पब्लिक सेक्टर कंपनी ओएनजीसी को कर्जदार बना दिया है।

ओएनजीसी कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि उनकी फेडरेशन को बिना पूर्व सूचना दिए किसी भी तरह के नियमों को थोपना सरकार को महंगा पड़ सकता है। कंपनी ने कहा है कि तीन महीने के भीतर सरकार ओएनजीसी को अपने फ़ैसलै लेने के लिए आज़ाद करे।

पत्र को यहां पढ़ा जा सकता है।

https://twitter.com/KPadmaRani1/status/1049143091989377024

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