कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस’ की रैंकिंग देखने वाले मोदी जी 6 करोड़ निवेशक परिवार की ज़िंदगी बर्बाद होते कैसे देख रहे हैं!

PACL कंपनी में पूंजी निवेश किए निवेशकों को अपने पैसे के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है.

संसद मार्ग. हज़ारों की भीड़. और बस एक ही नारा- PACL से निवेशकों का पैसा वापस करो. उत्तरप्रदेश के बदायूं ज़िला से दिल्ली पहुंचे रमेश कहते हैं, ” आज हमें दो साल हो गए घर से फ़रार हुए..हम दिल्ली में आकर मेहनत मजूरी कर रहे हैं. घर में बच्चे पूछते हैं कि पापा घर कब आओगे….मैं क्या जवाब दूं अपने बच्चों को?” दरअसल, रमेश PACL लिमटेड के एजेंट हैं. इनके अंदर ही कई निवेशकों ने इस कंपनी में लाखों का निवेश किया. लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद सेबी ने इस कंपनी को चिटफंड घोषित करते हुए ताला लगा दिया. अब निवेशक रमेश से पैसा मांग रहे हैं. पैसा नहीं देने की स्थिति में दरवाज़े पर गालियां देते हैं. जान से मारने की धमकियां देते हैं. अब घर से भागने के अलावा और कोई चारा नहीं रह गया.

संसद मार्ग पर जुटी भीड़ की लगभग एक जैसी कहानी है. रिश्ते नाते खत्म से हो गए हैं. समाज में भी सम्मान खो चुके हैं. हर दिन की धमकियों से परेशान हैं. कोई एक साल से तो कोई दो साल से घर छोड़ चुका है. जैसे कंपनी के बंद होने से उनकी दुनिया बर्बाद हो गई.

संसद मार्ग में निवेशकों की जुटी भीड़

छत्तीसगढ़ से आई मनीषा नागिया कहती हैं कि उन्होंने अपने घर-परिवार और रिश्तेदारों के ही लगभग एक करोड़ रुपए जमा कराए थे. कंपनी को चिटफंड घोषित करने को लेकर मनीषा बताती है कि “22 फरवरी 2014 को मैं ऑफिस गई थी पैसे जमा कराने…तो वहां मालूम चला कि यहां पैसा जमा नहीं हो रहा है. मुझे सेबी का नंबर दिया गया. मैंने जब वहां फ़ोन लगाया तो मालूम चला कि कंपनी पर सीबीआई जांच चल रही है.”

कंपनी के बंद होने पर अपने बाद की स्थिति पर मनीषा रुआंसा भरे नज़रों से कहती हैं, “आज हम इन्वेस्ट कराके घर-मायके में जाने लायक नहीं रह गए. आज हम कहीं खड़े रहने लायक नहीं रह गए. मान-सम्मान चला गया.” मनीषा का दुख उसके शब्द पर हावी हो जाता है…और वो चुप हो जाती है.

छत्तीसगढ़ की मनीषा नेगिया, जिन्होंने अपने घर-परिवार का पूरा पैसा PACL में लगा दी

 

PACL का क्या है मामला

पीएसीएल लिमटेड, कंपनी अधिनियम 1956 के तहत 1996 में पंजीकृत कंपनी है. यह पूरे देश में 17 वर्षों तक जमीन खरीदने और बेचने का काम की. पूरे देश से लगभग 6 करोड़ किसान और मजदूरों ने अपना पेट काटकर इसमें पैसा लगाया परंतु कंपनी की योजनाओं को अवैध मानते हुए SEBI ने 22 अगस्त 2014 को कंपनी पर ताला लगा दिया.

कंपनी के बंद हो जाने के बाद निवेशकों ने संगठन ऑल इंडिया इन्वेस्टर सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट ने 2 फरवरी 2016 को अपने आदेश में कहा कि छह महीने के भीतर कंपनी की सभी संपतियों को बेचकर निवेशकों को पैसा लौटा दिया जाए. आज कोर्ट के आदेश के 36 माह से ऊपर हो गए पर निवेशकों का पैसा अबतक नहीं लौटाया गया.

PACL में निवेशकों का जमा कुल पूंजी 49100 करोड़ रुपए है जो कंपनी की संपतियों की कुल क़ीमत 1.85 लाख करोड़ रुपए का बस एक चौथाई ही है.

PACL CHIT FUND SCAM

PACL CHIT FUND SCAM 'ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस' की रैंकिंग देखने वाले मोदी जी 6 करोड़ निवेशक परिवार की ज़िंदगी बर्बाद होते कैसे देख रहे हैं!

NewsCentral24x7 Hindi ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಭಾನುವಾರ, ಫೆಬ್ರವರಿ 3, 2019

खुर्जाबुलई यूपी से आए पिन्टू शर्मा कहते हैं कि कंपनी पैसा चुकाना चाहती है. यह मोदी सरकार पैसा नहीं देना चाहती. इनते सालों से कंपनी चल रही थी, कभी किसी का पैसा नहीं मारा. मोदी सरकार 2014 में आती है और कंपनी को चीटफंड बता देती है. निवेशकों को जितने पैसे देने है उससे दस गुना तो कंपनी की संपति है. यह अरुण जेटली कंपनी के विपक्ष में हैं वो नहीं चाहते कि निवेशकों को उनका पैसा मिले.

PACL और अरुण जेटली कनेक्शन

राजस्थान से आए इक़बाल कहते हैं, “आज जो अरुण जेटली वित्त मंत्री बनकर चिटफंड कंपनियों पर लगाम लगाने की बात कर रहे हैं, वो कई सालों तक PACL के क़ानूनी सलाहकार बने बैठे थे. जेटली इस कंपनी के सीईओ निर्मल सिंह भंगू के काफ़ी करीबी व्यक्ति हैं. इन्हें मालूम है कि इतना हज़ार करोड़ की संपति इसमें है…तो इसे कैसे खाया जा सकता है.”

पीएसीएल के नेशनल कॉर्डिनेटर पवन खेंडवाल बताते हैं कि “अरुण जेटली दस-बारह साल इस कंपनी के क़ानूनी सलाहकार रहे हैं. उनको सब मालूम है. हमलोग तीन बार जेटली जी से मिल चुके हैं. बस वह यह कह देते हैं कि निवेशकों का पैसा जल्द मिलेगा. यदि कंपनी ग़लत थी तो कार्रवाई किया जाए पर एक ही बार में छह करोड़ घरों को उजाड़ देना कहां तक सही है.”

हर राज्य से लाखों लोगों की ज़िंदगियां तबाह

PACL में कुल 24 राज्यों के करोड़ों लोगों ने अपने पैसे लगा रखे हैं. सबसे ज़्यादा उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश के लाखों परिवार इससे प्रभावित हैं.

राजस्थान के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने वाले गोपाल प्रजापत अपनी और अपने पिता की कमाई का पूरा पैसा इस कंपनी में लगा दिए. ऊपर से एक करोड़ रुपए अपने रिश्तेदारों से भी डलवा दिए. कंपनी बंद हो गई. प्रजापत कहते हैं, “अब हम कहीं के नहीं रह गए. सबकुछ लूट गया.” आगे का रास्ता पूछने पर कहते हैं- आगे क्या कहा जाए.सब भगवान के ऊपर है. मिल जाए तो ठीक है नहीं तो आत्महत्या.

अजमेर राजस्थान से ही संसद मार्ग पहुंचे रतन सिंह राव बताते हैं कि हमारे छोटे से गांव में ही सौ से डेढ़ सौ लोग हैं जो इसमें इन्वेस्ट कर रखा होगा. बहुत एंजेट अपने जान-पहचान रिश्तेदारों में के ही पैसे लगवाए थे. जैसे मुझे मेरे बगल वाले बड़े भैया ने बताया था.

ये एक PACL है ऐसे छोटे-मोटे तो सैकड़ों हैं

PACL के तरह ही एक चिटफंड कंपनी साई प्रसाद में लगभग सवा लाख करोड़ निवेशक की 3000 करोड़ रुपए फंसे हैं. इसके अलावा सहारा, ग्रीन टच, स्काई लार्क जैसी कई कंपनियां है जिसमें किसान मजदूर की गांढ़ी कमाई डूब गए.

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