कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पेंशन का अधिकार: पेंशन मांगने पर डांटकर भगा देता है गांव का मुखिया

पेंशन की मांग को लेकर कई राज्यों से वृद्धों ने किया दिल्ली में विरोध प्रदर्शन

पेंशन परिषद नामक गैर-सरकारी संगठन ने 30 सितंबर से 1 अक्टूबर तक विरोध प्रदर्शन में मांग रखी थी कि जिस प्रकार सरकारी कर्मचारियों को वेतन का आधा हिस्सा पेंशन के रूप में दिया जाता है। उसी प्रकार असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों की पेंशन राशि 3,000 रुपये की जाए। साथ ही परिषद द्वारा यह मांग भी रखी गई कि 55 साल से ज़्यादा आयु वाले नागरिकों को विभिन्न पेंशन योजनाओं का लाभ दिया जाए और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) और गरीबी रेखा से ऊपर (एपीएल) के फर्क को ख़त्म किया जाए।

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार पेंशन की मांग को लेकर अलग-अलग राज्यों से वृद्ध दिल्ली आए थे। बिहार के मुजफ़्फ़रपुर ज़िले से महंत मनियारी गांव से आई उर्मिला देवी ने कहा, “जब मैं गांव के मुखिया से पेंशन के बारे में पूछने गई तो मुखिया ने कहा कि पहले अपनी मांग का सिंदूर मिटा कर आओ तब पेंशन मिलेगी।” उर्मिला देवी ने कहा कि उनके पति का हाथ टूट गया है। वे चल नहीं पाते हैं। ऐसी हालात में उन्हें सरकार से कोई पेंशन नहीं मिल रही है।

उर्मिला की तरह और बहुत से वृद्धों को पेंशन नहीं मिलती है। सरकारी कर्मचारी उन्हें बार-बार यहां-वहां भटकने पर मजबूर कर देते हैं। रिश्वत लेकर भी काम पूरा नहीं करते हैं। यदि किसी को पेंशन मिलती भी है तो केंद्र सरकार द्वारा 200 रुपये की पेंशन दी जाती है। यानी रोज़ के हिसाब से लगभग सात रुपये की पेंशन दी जाती है उन्हें। गौरतलब है मणिपुरमिज़ोरममध्य-प्रदेशउत्तर-प्रदेश और बिहार में सबसे कम पेंशन दी जाती है।

ज्ञात हो कि भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) के तहत कई तरह की पेंशन दी जाती हैं जिनमें वृद्धावस्था पेंशनविधवा पेंशन और विकलांगता पेंशन आदि शामिल है। इसमें केंद्र सरकार द्वारा 200 रुपये प्रति महीने की पेंशन दी जाती है। कुछ राज्यों की अपनी अलग पेंशन योजनाएं भी है जैसे राजस्थान में एकल नारी सम्मान पेंशन योजना में 18 साल से ज़्यादा आयु की महिलाएं जो विधवा या तलाकशुदा हैं या जिन्हें पति ने छोड़ दिया है, उन महिलाओं को पेंशन दी जाती है। बिहार के मुज़फ़्फ़पुर ज़िले की रहने वाली गीता देवी कहती हैं कि वे आठ-नौ साल से सास- ससुर को पेंशन दिलाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन आज तक पेंशन नहीं मिली। गांव के मुखिया संजय मंडल ने परिवार से 1500 रुपये की रिश्वत भी ली थी। लेकिन फिर भी पेंशन का एक रुपया भी नहीं मिला।

पेंशन परिषद के अनुसार भारत में 10 करोड़ से ज़्यादा बुज़ुर्ग हैं जो मतदाताओं की संख्या का 12.5 प्रतिशत भाग हैं। जबकि पेंशन योजना का लाभ केवल 2.2 करोड़ बुज़ुर्गों को ही मिलता है। पेंशन न मिलने वालों में ज़्यादातर संख्या महिलाओं की है। राजस्थान के डूंगरपुर ज़िले के हीराभगत अहारी का कहना है कि आधार के कारण पेंशन मिलने में दिक्कतें आती है। वोटर कार्ड में उनकी उम्र ज़्यादा है और आधार कार्ड में उम्र कम लिखी गई है। इस कारण पेंशन के पात्र होने के बावजूद भी उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है। प्रदर्शन में मौजूद अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक ने कहा, सरकार कॉरपोरेट सेक्टर को लाखों करोड़ रुपये की छूट देती है। अगर यह छूट थोड़ी कम कर दी जाए तो पूरे भारत के बुज़ुर्गों को आसानी से 3,000 रुपये की पेंशन दी जा सकती है। सरकार समझती है कि वो गरीबों को पेंशन दान के रूप में दे रही हैंलेकिन ये दान नहीं बल्कि भारत की जनता का संवैधानिक अधिकार है। जीडीपी का दो प्रतिशत हिस्सा आसानी से पेंशन के लिए ख़र्च किया जा सकता है।

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