कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सोशल मीडिया पर फिर से वायरल है अवैध अंग व्यापार के लिए लोगों के मारे जाने की झूठी अफवाह

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल.

सोशल मीडिया में वायरल एक अफवाह में यह दावा किया गया है कि अवैध अंग व्यापार से जुड़े लोग मासूमों को मार कर उनके शरीर के अंगो को बेच रहे हैं। तेलुगु भाषा के संदेश में किये गए दावे के मुताबिक करीब 500 लोग बिहार, झारखण्ड से आये है, वो भिखारी के वेश में घूमते है, लोगों को मार रहे है और उनके अंगो को अस्पतालों और अवैध अंग व्यापर से जुड़े लोगों को बेच रहे हैं। दावा किया गया है कि करीब छह से सात अपराधियों को पुलिस ने पकड़ लिया है।

तेलुगु संदेश के मुताबिक,“ఒరిస్సా నుంచి ఈ రోజు అందిన సమాచారం ఏమిటంటే,,,బీహార్ నుంచి జార్ఖండ్ మధ్యలో బిచ్చగాళ్ళ వేషంలో ఒక 500 వందల మంది బయలుదేరారు..మార్గమధ్యంలో ఒంటరిగా దొరికిన వాళ్ళను చంపి మెడికల్ కాలేజీలకు,,మరియు కిడ్నీ ల దందా లకు సరఫరా చేస్తున్నారు…వీరిలో 6,7 మంది పట్టు బడినారు…ఆ 6,7 మందిని విచారిస్తే వారు మేము కాక ఇంకా 500 వందల మంది ఉన్నాం అని ఒప్పుకున్నారు…అందుకే బ్రదర్స్ ఎంత వీలైతే అంత మందికి ఈ మెసేజ్ ని మీ,,మీ ,,మిత్రులకు వాట్సాప్ ఇతరత్రా ద్వారా చేరవేయగలరు. (ओडिशा की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 500 लोग वेश बदल कर बिहार और झारखंड के बीच यात्रा कर रहे हैं। वो उनकी हत्या कर रहे है जिन्हें वे अकेला पा रहे है और शवों को मेडिकल कॉलेज और किडनी व्यवसायों को भेज रहे हैं। छह से सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चूका है। पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि वे करीब 500 की संख्या में है। इसलिए कृपया इस संदेश को सभी परिवार के सदस्यों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तत्काल रूप से भेजें। – अनुवाद)”

इस संदेश को व्हाट्सअप पर व्यापक रूप से साझा किया गया है। हालांकि, ऑल्ट न्यूज़ को फेसबुक और ट्विटर पर भी कुछ ऐसे संदेश मिले हैं। इस संदेश के साथ एक वीडियो भी साझा किया गया है, जिसमें एक लहूलुहान कमरे में शरीर के अंगो को फैला हुआ देखा जा सकता है।

इस संदेश को व्हाट्सअप पर व्यापक रूप से साझा किया गया है। हालांकि, ऑल्ट न्यूज़ को फेसबुक और ट्विटर पर भी कुछ ऐसे संदेश मिले हैं। इस संदेश के साथ एक वीडियो भी साझा किया गया है, जिसमें एक लहूलुहान कमरे में शरीर के अंगो को फैला हुआ देखा जा सकता है।

इसी संदेश को एक तस्वीर के साथ भी साझा किया गया था, जिसमें कुछ लोगों को पुलिस द्वारा पकड़ा गया है। पिछले साल इस तस्वीरों का प्रयोग दक्षिणी राज्यों में भीड़ को उकसाने के लिए किया गया था।

यह संदेश हिंदी में भी वायरल

यह संदेश हिंदी में भी इन्हीं तस्वीरों के साथ साझा किया जा रहा है।

हिंदी संदेश के मुताबिक,“उड़ीसा से आज खबर मिली है की बिहार से झारखंड होते हुए भिखारी के बेस में पांच सौ लोग निकले है जो रास्ते में जो मिलता है उसको काटकर कलेजे और कीडनी निकाल रहे है जिसमे से छः सात लोग पकड़े गए है .जो पकडे़ गए हैं वही लोग को कडी़ पुछताछ के बाद पांच सौ लोग आने की बात कबुल की है इसलिए हमारे भाईयों मेसेज को आपके जितने परिवार और मेंबर है सबको फॉरवर्ड कीजिये इसमे एक विडयो भी है जो फेसबुक इजाजत नहीं देता”।

इस संदेश को एक वीडियो के साथ साझा किया गया है, जिसमें कुछ विकृत किये हुए शरीर को देखा जा सकता है।

तथ्य जांच

वीडियो

ऑल्ट न्यूज़ ने इस संदेश की पिछले साल ही पड़ताल की थी, जिसमें इसे गलत पाया गया था। हालांकि, इस संदेश को उस वक़्त हाल में वायरल वीडियो के साथ साझा नहीं किया गया था। इस वीडियो को कई कि-फ्रेम में तोड़ कर, उन सभी तस्वीरों को यांडेक्स पर रिवर्स सर्च करने पर हमने पाया कि, सोशल मीडिया में यह वीडियो कम से कम वर्ष 2017 से वायरल है। इसे कई विभिन्न भाषाओं में साझा किया जाता रहा है।

मार्च 2019 में, एजेंस फ्रांस-प्रेस (AFP) ने इस वीडियो में दिख रही घटना से जुड़ी एक तस्वीर की पड़ताल की थी। यह तस्वीर उस समय इस संदेश के साथ साझा की गई थी कि –“फिलीपींस में लोगों के अंगो के लिए उनका अपहरण करके उनपर निशाना लगाया जा रहा है”।  इस तस्वीर को करीब 13 लाख लोगों ने साझा किया था।

एएफपी ने 18 जनवरी, 2017 को प्रकाशित किये गए gorebrasil.com वेबसाइट के लेख का हवाला दिया है, जिसमें यही वीडियो प्रकाशित किया गया था। पुर्तगाली के एक लेख को एएफपी ने अनुवादित किया है, जिसके मुताबिक, 14 जनवरी, 2017 को ब्राजील में अलास्का जेल में दंगा हुआ था। वीडियो में दिखाई दे रहे लोग पूर्वोत्तर ब्राजील के लहज़े में पुर्तगाली भाषा में बातचीत करते हुए सुनाई दे रहे हैं।

वीडियो में 20 सेकंड के समय पर, एक आदमी को “पोलिसिया सिविल” नाम की टी-शर्ट पहने हुए देखा जा सकता है, जो ब्राजील में ‘सिविल पुलिस’ के लिए काम करते हैं।

14 जनवरी को, अलास्का जेल में विरोधी गैंग के बीच एक दंगा हुआ था, जिसके कारण कम से कम 30 कैदियों की मौत हो गई थी। हिंसा के बाद विकृत किये हुए शवों को तस्वीरों में देखा जा सकता है। इस घटना को अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने व्यापक रूप से प्रकाशित किया था, जिसमें द गार्डियन एएफपीअल जज़ीरा और बीबीसी शामिल हैं।

द गार्डियन  के एक लेख के मुताबिक “एक ड्रग गैंग के सदस्यों ने अलास्का जेल में एक खेमे पर हमला कर दिया, जहां पर उनके विरोधी आराम कर रहे थे, यह बात रविवार को रियो ग्रांडे नॉर्ट राज्य के सुरक्षा सचिव ने कही,”- -(अनुवाद)। जनवरी 2018 में, जेल में हुई इस घटना में करीब 140 कैदियों की मौत हो गई थी।

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, “माना जा रहा है कि गैंग के बिच हुई झड़प ड्रग तस्करी के लाभदायक रास्तो पर नियंत्रण को लेकर हुई थी।”-(अनुवाद)। इसमें आगे बताते हुए लिखा गया है कि,“सर काटना और अंगो को विखंडित करना ब्राज़ील की हिंसा में एक आम बात है, जिसमें करीब 40 फीसदी कैदियों को सजा सुनाई जानी है, लेकिन क्रूरता की इस लहार ने यहां पर कई लोगों को भयभीत कर दिया है”-(अनुवाद)।

जब तक जेल, हिंसा के सन्दर्भ में इस वीडियो के बारे में एएफपी के सवालों से खामोश थी, तब तक मुख्य धारा की मीडिया इस विकृत शवों के वीडियो के बारे में कल्पित बातें की गई।

तस्वीरें

फ़िलहाल वायरल इन तस्वीरों के समूह की ऑल्ट न्यूज़ कई बार पड़ताल करके, इसे गलत बता चूका है। अभी इन तस्वीरों को एक अन्य दावा कि बच्चों का अपहरण करने वाली एक गैंग, जो अंगो के व्यवसाय से जुड़े लोगों को अंग बेचने का काम करती है, अब गुजरात में अपना शिकार खोज रही है। यह संदेश गुजराती भाषा में वायरल है।

ये तस्वीरें सोशल मीडिया में पिछले साल से साझा की जा रही है और जिसकी पड़ताल कन्नड़ के समाचारपत्र प्रजावाणी द्वारा की जा चुकी है और इसे गलत पाया गया है। मीडिया संगठन के लेख में, कन्नड़ पुलिस के मुताबिक, यह तस्वीर 3-4 साल पुरानी है। उस समय, पुलिस ने लोगों से अपील की थी कि वह व्हाट्सअप पर चल रही इन अफवाहों पर यकीन ना करें।

पिछले दो वर्षों में देश भर में बच्चों को अगवा करने की अफवाहों के चलते आक्रोशित लोगों ने कम से कम 31 लोगों की हत्या कर दी है। कुछ अफवाहे क्षेत्रीय होती है, जिसका मतलब है कि वह उसी राज्य की भाषा में प्रसारित की जा रही है। इन अफवाहों को परखने का सबसे अच्छा तरीका है कि इनसे जुड़े समाचार लेखों को देखा जाए। अगर ऐसा कोई समाचार ना मिले तो यह इशारा है कि सोशल मीडिया में किया गया दावा सत्यापित नहीं है।

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