कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पिंजरा तोड़: अब डीयू की लड़कियों ने छेड़ा पितृसत्ता के ख़िलाफ़ बिगुल

पिंजरा तोड़ एक आंदोलन का नाम है, जो आज से तीन साल पहले 8 अक्टूबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी की ही छात्राओं ने शुरू किया था।

पिछले कई दिनों से देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों से लड़कियों के आंदोलित होने की खबरें लगातार आ रही हैं। मुद्दा है, “लड़कियों का हॉस्टल भी लड़कों के हॉस्टल की तरह 24 घण्टे खुला रहे। इसी कड़ी में 8 अक्टूबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी की लड़कियां शाम चार बजे आर्ट फैकल्टी के गेट के आगे इक्कट्ठा हो जाती हैं और “पिंजरा तोड़” नाम से प्रदर्शन शुरू कर देती हैं।

क्या है पिंजरा तोड़?

पिंजरा तोड़ एक आंदोलन का नाम है, जो आज से तीन साल पहले 8 अक्टूबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी की ही छात्राओं ने शुरू किया था। इस आंदोलन का नाम लड़कियों ने पिंजरा तोड़ इसलिए रखा क्योंकि, उन्हें रात को हॉस्टल पिंजरे जैसा लगता है। इसका कारण है कि उन्हें रात के समय में हॉस्टल से बाहर नहीं निकलने दिया जाता। जबकि यूनिवर्सिटी के कैंपस तक पहुंचने वाली लड़कियां 18 साल से ऊपर हो चुकी होती हैं। इसके उलट लड़कों को इस तरह की कोई पाबंदियां नहीं होती हैं।

डीयू में होस्टल कर्फ्यू के खिलाफ चल रहे लड़कियों के पिंजरा तोड़ धरने से लाइव

Posted by NewsCentral24x7 on Monday, October 8, 2018

इस आंदोलन में शामिल हुई एक लड़की बताती है, “यूनिवर्सिटी एक तो सभी लड़कियों को हॉस्टल नहीं देती है, जिन्हें देती है उन्हें लैंगिक भेदभाव करते हुए रात को हॉस्टल में कैद रखती है। अगर किसी लड़की का सुबह के चार बजे बाहर चाय पीने का मन हो तो उसे जाने नहीं दिया जाता है। जिन लड़कियों को हॉस्टल नहीं मिलता है, उन्हें बाहर पीजी लेकर रहना पड़ता है और वहां भी उन्हें रात के समय बाहर निकलने की आज़ादी नहीं दी जाती है। हम छात्राओं को घर और समाज में तो पितृसत्ता के नियमों में घेरकर रखा ही जाता है, मगर यूनिवर्सिटी प्रशासन भी ऐसा करने में बिल्कुल पीछे नहीं हैं। रात को अगर लड़की थोड़ा सा लेट हो जाती है तो भारी-भरकम जुर्माना लाद दिया जाता है। हम आज यूनिवर्सिटी प्रशासन के पितृसत्तात्मक नियमों के खिलाफ यहाँ इक्कठे हुए हैं और यहां से अब इसकी कमर तोड़कर ही हटेंगे।”

डीयू में होस्टल कर्फ्यू के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन से लाइव

Posted by NewsCentral24x7 on Monday, October 8, 2018

 

इन लड़कियों की होस्टल से जुड़ी हुई कई अलग-अलग मांगे हैं। अभी तक प्रशासन की तरफ़ से कोई भी अधिकारी इन लड़कियों से बात करने नहीं आया है।

(विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही प्रकाशित किया जाएगा।)

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