कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पांच सालों में झूठेन्द्र मोदी के पांच सबसे बड़े झूठ

डिजिटल कैमरा और ईमेल के अस्तित्व में आने से पहले ही उसका उपयोग करने वाली बात तो झूठ की भी सारी हदे पार कर जाता है.

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल (2014-2019) को इतिहास कई बातों के लिए याद रखेगा, लेकिन इन बातों में ‘झूठ बोलना’ निश्चित तौर से सूची में सबसे ऊपर होगा. इस झूठ की शुरुआत मोदी शासन के दौरान हुई इसलिए इस काल को फ़र्जी ख़बरों का युग भी कहा जा सकता है.

डिजिटल कैमरा और ईमेल के अस्तित्व में आने से पहले ही उसका उपयोग करने वाली बात तो झूठ की भी सारी हदे पार कर जाता है. पीएम नरेंद्र मोदी ने ग़लत सूचना फैलाना जारी रखा है. वो अपनी कल्पना के आधार पर खुलेआम धोखाखड़ी के दावे करते हैं.

अक्सर पीएम के झूठे दावों का तथ्य जांच करने वाली वेबसाइट द्वारा भंडाफोड़ किया जाता है. फिर भी प्रधानमंत्री मोदी की झूठों में कमी नहीं आती. modillies.in नामक वेबसाइट 2014 के बाद से विशेष रुप से मोदी के झूठ पर नज़र रखती है. यहां प्रधानमंत्री मोदी के पांच बड़े झूठों की संक्षिप्त में सूची दी गई है.

2 लाख करोड़ का काला धन बैंकों में पहुंचा 

8 नवंबर 2016 की रात हमेशा के लिए बदनाम हो गई. जब प्रधानमंत्री मोदी ने देश को ‘’भाइयों और बहनों’’ कहकर संबोधित करते हुए कहा था कि, “भ्रष्ट्राचार और काले धन को ख़त्म करने के लिए हमने फैसला किया है कि वर्तमान में उपयोग किए जा रहे पांच सौ और हज़ार रुपये के करेंसी नोट अब कानूनी तौर अमान्य होगें. आज रात मध्यरात्रि से, 8 नवंबर 2016 तक…देशविरोधी और असामाजिक तत्वों द्वारा जमा किए गये 500 और 1000 के नोट सिर्फ कागज़ का एक बेकार टुकड़ा बन जाएगा.”

प्रधानमंत्री द्वारा अचानक लिए गए इस एक तरफ़े फैसले से पूरे देश में भगदड़ मच गई. इसके कारण लोगों को अपने पैसे ही निकलाने और जमा कराने में बहुत ही मुश्किलों को सामना करना पड़ा. पूरा देश को एक लाइन में खड़ा दिया गया. इससे एटीएम की लाइन में लगे लोगों की मृत्यु, अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक प्रभाव, छोटे उद्यमियों के नुकसान हुआ. लेकिन, सवाल यह है कि , क्या भ्रष्टाचार और काले धन को ख़त्म करने के लिए विमुद्रीकरण ड्राइव का प्रबंधन किया गया था? इसका जवाब है ‘नहीं’.

(नोटबंदी के दौरान लाइनों में इंतजार करते लोग)

काले धन की बात करें तो 2018 तक 99 प्रतिशत से अधिक नकदी बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गई थी. नोटबंदी के समय 500 और 1000 रुपये के अमान्य नोटों की कुल कीमत 15.44 लाख़ करोड़ रुपये था, जिसमें से सिर्फ 16 हज़ार करोड़ रुपये ही आरबीआई को वापस नहीं मिले.

दरअसल, भारतीय रिर्जव बैंक के बोर्ड ने 8 नवंबर को इसकी घोषणा से कुछ घंटे पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी के नकारात्मक प्रभाव की चेतावनी दी थी और कहा था कि इस कदम का कोई भौतिक प्रभाव नहीं होगा. काले धन से निपटने के लिए दिल्ली में आयोजित 561 वीं बैठक में आरबीआई बोर्ड ने कहा था कि “अधिकांश काले धन को नकदी के रुप में नहीं बल्कि वास्तविक क्षेत्र की संपति जैसे सोना, या अचल संपति के रुप में रखा जाता है और नोटबंदी से इन संपतियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.”

दरअसल, 2017 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने कहा था कि, “बैंकों में जमा किए गए 1.75 लाख करोड़ रुपए से अधिक स्कैनर के तहत थी और 2 लाख करोड़ रुपये से का काला धन बैंकों में पहुंच गया था. लेकिन, न तो मोदी और ना ही सरकार ने इन आंकड़ों का पर कोई स्पष्टीकरण दिया. वहीं, भारतीय रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट का अनुमान है कि, 2.7 लाख करोड़ रुपये से 4.3 लाख करोड़ रुपए के बीच अनअकांउटेड आय नहीं बल्कि “अतिरिक्त जमा” राशि है.

इसके अलावा आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर आर गांधी ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि, आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में वापस आने वाले पुराने नोटों की गिनती मार्च 2018 से पहले नहीं होता है. इसलिए यह आश्चर्य है कि आरबीआई के गिनती से पहले ही मोदी जी ने काले धन का अनुमान कैसे लगा लिया.

क्या चौकीदार की चौकीदारी में पिछले पांच सालों में कोई बड़ा विस्फ़ोट हुआ ?

बेंगलुरु में, 13 अप्रैल 2019 को पीएम मोदी ने कहा था, “क्या आपके चौकीदार की चौकीदारी में पिछले पांच सालों में कोई बड़ा विस्फ़ोट हुआ है? यह आपके एक वोट की शक्ति थी जिसने इसे संभव बनाया.” इसके बाद उन्होंने 6 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में भी कुछ ऐसा ही दावा किया. लेकिन, क्या बार-बार किसी चीज़ को दोहराने से वह साबित हो जाती है? नहीं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014-2018 के बीच, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमलों में सुरक्षाकर्मियों की मौत की घटनाओं में 93 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2014 में राज्य में आतंकवादी हमलों में 24 सेना के जवान मारे गए थे और यह संख्या 2018 में बढ़कर 91 हो गई थी. इसी तरह राज्य में आतंकवादी हमलों की संख्या में 176 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. जबकि 2014 में 222 और 2018 में 614 आतंकवादी घटनाएं सामने हुई थी.

पुलवामा हमला (साभार- @sampadscales)

FactChecker.in के अनुसार, भारत में 2018 में 174 आईडी विस्फोट हुए, जिसमें 108 लोगों की जान चली गई. वहीं, 2017 में 244 विस्फोटक घटनाएं हुई जिसमें 61 लोगों की जान चली गई. साथ ही यह भी कहा गया है कि राष्टीय सुरक्षा गार्ड के राष्ट्रीय बम डेटा केंद्र द्वारा एकत्र किए गये आंकड़ों के अनुसार 2016 में देशभर में 406 विस्फोटक घटनाए हुई जिसमें 337 आईईडी और 69 एक्सप्लोसिभ ऑर्डनेंस घटनाएं शामिल थी.

इसके बाद पुलवामा आतंकी हमला जिसमें 40 से अधिक सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए. पुलवामा हमला भारत में सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक और राष्ट्रीय सुरक्षा विफलता के उदाहरण है.

आज़ादी के 67 सालों के बाद. बिजली केवल 70 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक पहुंची

दिसंबर 2018 में नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर दावा करने लगे कि, इस बारे में सोचिए कि आज़ादी के 67 सालों बाद भी बिजली कनेक्शन सिर्फ 70 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक पहुंचा है और अब पिछले 4 सालों में 95 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को बिजली का कनेक्शन मिला है.

यह दावा बिल्कुल ग़लत है, FactChecker.in के अनुसार जब भाजपा 2014 में सत्ता में आयी थी, तब 97 प्रतिशत गांवों में पहले से ही बिजली पहुंच चुकी थी. सिर्फ 18,452 या तीन प्रतिशत हिस्से को ग्रीड से जोड़ा जाना बाकी था.

वहीं, मोदी के विद्युतीकरण के दावों के बावजूद केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 2018 में 360,000 गांवों में घरेलू सर्वेक्षण किया गया. जिसमें 14,700 गावों में बिजली की कोई सुविधा नहीं है. अप्रैल 2018 में भाजपा सरकार ने भारतीय गांवों को 100 प्रतिशत विद्युतीकृत घोषित किया गया था. इस घोषणा के तुरंत बाद इंडिया टूडे के रिपोर्ट में पाया गया कि कई गांवों में अब भी बिजली नहीं पहुंची थी. तब विद्युत मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ जनगणना वालों गांवों में बिजली पहुंचाई थी.

इसके बाद स्क्रॉल की एक रिपोर्ट में 100 प्रतिशत विद्ययुतिकरण के लक्ष्य की सच्चाई सामने आई. जिसमें अप्रैल से जनवारी तक उत्तर प्रदेश में 1.98 करोड़ में बिजली पहुंचाने का लक्ष्या था जो घटकर 74.4 लाख पर पहुंच गया. स्क्रॉल ने दावा किया कि लगभग सभी राज्यों में कुछ ऐसा ही हाल था. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लक्ष्य में बिहार में सबसे ज्यादा कमी देखी गई. जो 1.6 करोड़ से घटकर 35 लाख घरो तक पहुंच गया. यानी की पूरी 79 प्रतिशत की कमी आयी.

सौभाग्य डैशबोर्ड के अनुसार, बिहार ने 100 प्रतिशत विद्यूतिकरण हासिल किया है. हरियाणा ने अपने लक्ष्य से 81.5 प्रतिशत, कर्नाटक ने 76.39 प्रतिशत,  और आंध्र प्रदेश ने 72.83 प्रतिशत घटाए है.

भारत को रोग-प्रतिरोधक क्षमता तक विश्व स्तर तक पहुंचने में 40 साल और लगेंगे

मार्च 2018 में मोदी ने कहा, “मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता, लेकिन मैं आपको हमारे टीकाकरण कार्यक्रम के बारे में बताना चाहता हूं. भारत में टीकाकरण 30 से 35 सालों से चल रहा है. फिर भी 2014 तक, हम पूर्ण कवरेज के लक्ष्य को प्राप्त करने में असमर्थ थे. यदि हम इसी गति से आगे बढ़ते रहे तो भारत को टीकाकरण के तहत विश्वस्तर तक पहुंचने में 40 साल और लग जाएंगे.”

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (1992-93 और 2015-16 के बीच) के माध्यम से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रतिरक्षण कवरेज औसतन, प्रति चक्र 19.6 प्रतिशत अंक (औसतन, 7.6 वर्ष से अलग) से बढ़ा. FactChecker.in ने इस डेटा का विश्लेषण करते हुए पाया कि भारत में 2029 तक 92 प्रतिशत टीकाकरण होगा, और 2037 से कम समय में पूर्ण टीकाकरण होगा.

इसके अलावा, मोदी के मिशन इन्द्रधनुष को जोरदार धक्का लगा है. भारतीय टीकाकरण कार्यक्रम के पुनर्संरचना के तरीकों पर जोर दिया गया है. इस वर्ष की शुरुआत में, द प्रिंट ने बताया था कि भाजपा सरकार दोनों प्रकार के टीकों – ओरल पोलियोवायरस वैक्सीन (ओपीवी) और निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) की कमी से जुझ रही है.

2014 में सिर्फ 56 प्रतिशत ग्रामीण आवास सड़क मार्ग से जुड़े थे

जनवरी 2019 में पीएम मोदी ने एक और दावा किया जिसका वास्तिवकता से कोई लेना-देना नहीं था. उन्होंने कहा, “जब हमने सरकार बनाई थी, तो केवल 56 प्रतिशत ग्रामीण आवास एक सड़क से जुड़े थे. आज 90 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण आवास सड़क मार्ग से जुड़े हुए हैं. मुझे यकीन है कि हम निश्चित रूप से जल्द ही 100 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल कर लेंगे. ”

जबकि, सच्चाई यह है कि, जनवरी 2019 तक, लगभग 79 प्रतिशत ग्रामीण आवास एक सड़क से जुड़े थे, न कि 90 प्रतिशत, जैसा कि पीएम मोदी ने दावा किया था. FactChecker.in ने पाया कि प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, 2014 में सड़कें 53 प्रतिशत ग्रामीण बस्तियों में शामिल हो गईं, लेकिन जनवरी 2019 में यह बढ़कर 79 प्रतिशत (कुल 186,425 का 147,996) हो गई.

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