कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मोदी जी द्वारा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान सैकड़ों दलितों को घरों में किया गया कैद

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की योजना से सैकड़ों दलित अपने घरों से बेघर होने को मजबूर हैं.

प्रधानमंत्री मोदी बीते शुक्रवार को वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करने पहुंचे थे, उसी दौरान आसपास रहने वाले सैकड़ों दलितों को उनके घरों में कैद कर दिया गया था.

पीएम मोदी के आगमन पर इन लोगों को गली-मुहल्लों में निकलने की भी इजाजत नहीं दी गई. पीएम मोदी जब उद्घाटन के बाद वहां से चले गए तब स्थानीय लोगों को घरों से बाहर निकलने की इजाजत दी गई.

नवजीवन की ख़बर के अनुसार मणिकर्निका घाट के नजदीक जलसेन घाट के पास मुख्य रूप से साहनी, मल्लाह जैसी अनुसूचित और अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी रहती है. सालों से यहां रहने के बाद अब इन्हें यहां से हटाए जाने की योजना बनाई गई है. ताकि विश्वनाथ धाम को विकसित किया जा सके. ग़ौरतलब है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के जरिए विश्वनाथ धाम को सीधे गंगा से जोड़ा जाएगा.

इस पूरी योजना में सैकड़ों दलित अपने घरों से बेघर होना पड़ेगा. पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को बनाने के लिए तकरीबन आधे इकाले को उजाड़ा दिया गया है. जिसमें 167 घर और दर्जनों मंदिर शामिल हैं. जिन लोगों के घर उजाड़े गए हैं उनमें अभी बहुत से लोगों को मुआवजा नहीं मिला है. वे लोग धूल-मिट्टी के बीच रहने को मजबूर हैं.

बीते 24 फरवरी को मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय पुलिस ने यहां पहुंचकर लोगों के घरों को खाली कराना शुरू कर दिया था. उस समय घरों में केवल महिलाएं मौजूद थी. महिलाओं ने अधिकारियों से घर के पुरुषों के वापस आने तक इंतजार करने को कहा, लेकिन अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी और घर की दीवारों पर हथौड़े मारना शुरू कर दिया. महिलाओं ने जब उनका विरोध किया तो पुलिस ने उन पर हमला कर दिया. जिसमें कई महिलाएं घायल हो गई.

इलाके की महिलाओं ने पीएम मोदी पर सिर्फ दिखावा करने का आरोप लगाया. एक महिला ने कहा कि पैर धोने से कुछ नहीं होता है, यहां आकर देखें कि हम लोग रोज क्या झेल रहे हैं. मंदिर के गुंडे, ठेकेदार और पुलिस वाले रोज यहां आकर औरतों के साथ जबरदस्ती करते हैं. हम घरों में होते हैं और वे लोग हथौड़ा चलाना शुरू कर देते हैं. मुआवजे का एक पैसा नहीं मिला है. किराए पर रखने के लिए कोई तैयार नहीं है. हमारी सुनने वाला कोई नहीं है.

यहां के लोगों को मीडिया से बहुत शिकायतें हैं जो इनकी मुसीबतों को उजागर करने में असफल साबित हो रही है.

मणिकर्निका घाट पर चाय की दुकान चलाने वाले एक युवक ने कहा है कि, अगर हम विरोध में एक शब्द भी बोलेंगे तो वे हमें खत्म कर देंगे. हमारी मदद करने वाला कोई नहीं है. बड़ी जाति वाले मोटा मुआवजा लेकर चले गए. हमें भी मुआवजा और मदद दोनों चाहिए, लेकिन हमें कुछ  नहीं मिल रहा. हम अभिशप्त हैं.

विडंबना है कि जब पीएम मोदी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन करने आए थे तो यहां के दलितों और पिछड़े लोगों को उम्मीद थी कि मोदी जी आएंगे तो उनकी शिकायतें सुनेंगे. लेकिन इसके ठीक विपरीत सैकड़ों दलितों को कड़ी निगरानी के बीच घरों में कैद कर दिया गया.

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