कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पिछले 5 वर्षों से धमाके रुके हैं: PM मोदी, सच? सरकारी आँकड़े: पिछले 5 सालों में जम्मू-कश्मीर में 176 प्रतिशत बढ़े आतंकी हमले

साल 2014-18 के बीच जवानों की मौत में 93 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

लोकसभा चुनाव प्रचार में लगे प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़ी बयानबाजी करके अपनी पीठ खुद ही थपथपा रहे हैं. इसी दौरान उत्तर प्रदेश के अमरोहा में रैली करने पहुंचे प्रधानमंत्री ने कहा है कि पिछले 5 सालों में देश में धमाके रुक गए हैं. हम प्रधानमंत्री मोदी के इस दावे की जांच तथ्यों के आधार पर करेंगे.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि बीते 5 सालों में धमाके रुक गए हैं. बम-बंदूकों की आवाज बंद हुई है. निर्दोष लोगों की जान जाना बंद हो गई. ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि आपने दिल्ली में चौकीदार को बिठा रखा है. क्योंकि आतंकियों को पता है कि वे एक ग़लती करेंगे तो मोदी उन्हें पाताल से भी ढूंढकर सबक सिखाएगा.

वैसे तो मोदी जी के चुनावी जुमलों से जनता बखूबी वाकिफ हो चुकी है. लेकिन शायद मोदी जी को पिछले पांच साल में हुए आतंकी हमलों के बारे में जानकारी नहीं है या फिर वे जानबूझकर इसकी अनदेखी कर रहे हैं.

पुलवामा हमले को बीते ज्यादा दिन नहीं हुए हैं, जिसमें हमारे 40 जवान शहीद हो गए थे. मोदी सरकार ने एयर स्ट्राइक करने का दावा तो किया लेकिन भारतीय वायुसेना का सारा श्रेय भी ले लिया.

मोदी सरकार द्वारा 5 फ़रवरी 2019 को जारी किए गए डेटा और व्यापक रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2014 से 2018 के बीच राज्य (जम्मू-कश्मीर) में आतंकवादी घटनाओं में मारे गए सुरक्षाकर्मियों की संख्या में 93 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस अवधि में राज्य में आतंकवादी घटनाओं की संख्या में 176 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई. फिर भी, मोदी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर न केवल मजबूत होने का दिखावा कर रही है और उलटे विपक्षी दलों पर उंगली भी उठा रही है.

गृह मंत्रालय के ओर से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि इस अवधि में, राज्य में कुल 1,708 आतंकवादी घटनाएं, (औसतन, हर महीने 28 आतंकवादी घटनाएं) को अंजाम दिया गया है.

बीते साल भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली संसद की आकलन (मूल्यांकन) समिति (जिसमें 16 बीजेपी के सांसद भी सम्मिलित थे) ने कहा था कि पिछले चार सालों में मोदी सरकार रक्षा तैयारियों को उस निचले स्तर तक ले आई है, जिसके कारण 1962 में भारत को चीन के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था.

न्यूज़सेन्ट्रल24X7  में प्रकाशित स्वाती चतुर्वेदी की रिपोर्ट के अनुसार समिति ने 29 वीं ‘सशस्त्र बल-रक्षा उत्पादन और खरीद की तैयारी’ की रिपोर्ट में कहा कि मोदी सरकार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की उपेक्षा कर रही है, जिसका अंजाम ‘खतरनाक’ हो सकता है.

रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों का कहना है, “आज जीडीपी का 1.6 प्रतिशत रक्षा पर खर्च होने से भारत का रक्षा बजट जीडीपी अनुपात, साल 1962 से भी पहले के स्तर पर पहुंच गया है. इसके परिणाम अशुभ हो सकते हैं.”

आकलन समिति ने जोर देकर कहा था कि देश की सुरक्षा के लिए वर्तमान में रक्षा तैयारियों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का आवंटन और विस्तार तथा आधुनिकीकरण योजनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार की विदेश नीति के कारण चीन के साथ हमारे रिश्ते लगातार बिगड़े हैं और पाकिस्तान के साथ रिश्तों में कई उलट-फेर (यू-टर्न) देखा गया है.

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