कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

प्रधानमंत्री ने कहा- देश के लिए झटका नहीं था नोटबंदी का फ़ैसला, सच्चाई को यहां समझिए

प्रधानमंत्री ने कहा- देश के लिए झटका नहीं था नोटबंदी का फ़ैसला, सच्चाई को यहां समझिए

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए साल के पहले दिन ही एक समाचार एजेंसी को इंटरव्यू दिया. इस दौरान नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री ने एक बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि नोटबंदी देश के नागरिकों के लिए कोई झटका नहीं था, बल्कि उन्होंने तो इसके लिए एक साल पहले ही देशवासियों को चेतावनी दे दी थी.

इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी से जुड़े सवाल पर कहा, “यह झटका नहीं था. हमने एक साल पहले ही लोगों को चेता दिया था कि यदि आपके पास ऐसी दौलत (काली कमाई) है तो आप इसे जमा करा दीजिए, पेनल्‍टी दीजिए और आपकी मदद की जाएगी. हालांकि उन्‍होंने सोचा कि मोदी भी बाकी लोगों की तरह ही काम करेगा इसलिए काफी कम लोग अपनी मर्जी से आगे आए.”

मोदी सरकार नोटबंदी के फ़ायदे गिनाती रहती है. लेकिन, अगर हम आरबीआई की एक रिपोर्ट को देखें तो नोटबंदी के बाद बंद किए गए 500 और 1,000 रुपए के नोटों का 99.3 प्रतिशत हिस्सा बैंकों के पास आ गया है. यानि काला धन सफ़ेद बनकर चलन में आ गया है. रिज़र्व बैंक ने यह जानकारी अपने वार्षिक रिपोर्ट में दी थी.

8 नवम्बर, 2016 की रात प्रधानमंत्री मोदी ने 500 और 1000 रुपए के नोटों को चलन से बाहर कर दिया. इसके बाद देश में एक उथल पुथल और अराजकता का माहौल बन गया. इसमें करीब 100 से ज़्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी.

दूसरी तरफ छोटे-बड़े उद्योगों पर भी नोटबंदी का सीधा असर पड़ा. इस दौरान लाखो लोगों की नौकरियां छिन गईं. ऑल इंडिया मैन्यूफैक्चर्स ऑर्गनाइजेशन (एआईएमओ) की एक सर्वे के मुताबिक 2014 के बाद देश में मध्यम और लघु उद्योगों में लगातार गिरावट देखी गई जिसका कारण मोदी सरकार के नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों को बताया गया.

इन ज़मीनी सच्चाइयों को देखें तो पता चलता है कि नोटबंदी देश के लिए झटका था, जिससे अभी भी देश और उसकी अर्थव्यवस्था बाहर नहीं निकल सकी है.

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