कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

भुला नहीं पाती

कवयित्री रजनी की एक कविता

भुला नहीं पाती

कूड़े के ढेर पर

भिनभिनाती मक्खियों के बीच

जूठे पत्तल चाटती

बिखरे बालों वाली

उस बच्ची का चेहरा।

 

पटरी से अपने हाथों के बल रेंगते हुए

गाड़ी की खिड़की पर दस्तक देते हुए

उस अपंग युवक की सूरत भी रह रह कर

आ जाती है मेरी आँखों के सामने।

 

गली में कागज़ बीनते उस

अधनंगे बच्चे का उदास चेहरा भी

साफ़ याद है मुझे

क्यों न हो यही तो तस्वीर है

हमारे कल के भारत की

जो बातें  करता है अपने सुनहरे इतिहास की

पर बना नहीं पाया

इनका भविष्य

 

ज़िन्दगी की सौगात न सही

मौत का वादा तो

अब किया ही जा सकता है।

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