कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अंतरिक्ष में भारत की मौजूदगी का कैसा रहा है इतिहास, यहां समझिए

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा से पूछा कि अन्तरिक्ष से भारत कैसा दिखता है. राकेश शर्मा ने गर्व से उत्तर दिया- "सारे जहां से अच्छा."

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को “मिशन शक्ति” नाम का ऑपरेशन सफ़ल होने की बात कही है. प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष में एंटी मिसाइल द्वारा एक लाइव सैटेलाइट को तबाह करने की घोषणा की है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने आज अभूतपूर्व सफ़लता हासिल की है. ऐसे में हम इतिहास के हवाले से देखेंगे कि पिछले कुछ दशकों में भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में किस तरह प्रगति की है.

• 1962 में स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, उनके करीबी सहयोगी और वैज्ञानिक विक्रम अंबालाल साराभाई की कोशिशों से अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भारतीय राष्ट्रीय समिति (INCOSPAR) स्थापित किया गया.

• 1966 में एनडीए पास कर इंडियन एयर फोर्स कैडेट बने राकेश शर्मा ने 1970 में भारतीय वायु सेना को ज्वाइन किया.

• भारत का पहला उपग्रह “आर्यभट्ट” था. इसे 19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ द्वारा शुरू किया गया था. इस उपग्रह का नाम गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर रखा गया.

• 7 जून 1979 को भारत ने अंतरिक्ष में दूसरा उपग्रह भेजा. “भास्कर” नाम का यह उपग्रह 445 किलो का था, इसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था.

• 1980 में “रोहिणी” उपग्रह पहला भारतीय-निर्मित प्रक्षेपण यान एसएलवी -3 बन गया. जिसे कक्षा में स्थापित किया गया. इसरो ने बाद में दो अन्य रॉकेट विकसित किए.

• 1980 के दशक से उपग्रह प्रक्षेपण यान-3 पर अनुसंधान का कार्य किया जाने लगा. इसके बाद पीएसएलवी जीएसएलवी आदि रॉकेट को विकसित किया गया.

• 1984 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और सोवियत संघ के इंटरकॉसमॉस कार्यक्रम के एक संयुक्त अंतरिक्ष अभियान के अंतर्गत राकेश शर्मा 8 दिन तक अंतरिक्ष में रहे. ये उस समय भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर और विमानचालक थे.

• उनकी अन्तरिक्ष यात्रा के दौरान भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा से पूछा कि अन्तरिक्ष से भारत कैसा दिखता है. राकेश शर्मा ने गर्व से उत्तर दिया- “सारे जहां से अच्छा.”

• 1988 में भारत के पहले दूर संवेदी उपग्रह आई आर एस-1A का प्रक्षेपण किया गया. इन्सैट-1C का जुलाई में प्रक्षेपण. नवंबर में परित्याग.

• इसरो ने 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रमा की परिक्रमा के लिए चंद्रयान -1 भेजा और 5 नवंबर, 2013 को मंगल ग्रह की परिक्रमा के लिए मंगलयान (मंगल आर्बिटर मिशन) को भेजा गया. 24 सितंबर 2014 को यह यान मंगल ग्रह की कक्षा में पहुंच गया. इसके साथ ही पहले प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुंचने वाला पहला देश बन गया.

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