कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के उद्घाटन के दिन हज़ारों घरों में नहीं जलेगा चूल्हा, मनाया जाएगा शोक दिवस

आदिवासी समाज के करीब 75 हज़़ार लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार इस परियोजना के लिए उनकी जमीनों को जबर्दस्ती ले रही है।

प्रधानमंत्री मोदी गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण करने जा रहे हैं। 182 मीटर ऊंची इस प्रतिमा को विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा बताया जा रहा है। मोदी सरकार इसकी वाहवाही लूटने में जुटी है। लेकिन, गुजरात के करीब 75 हज़ार आदिवासी इस परियोजना के उद्घाटन के दिन शोक दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं।

उनका कहना है कि इस परियोजना से आदिवासियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। आदिवासी समाज के लोगों की शिकायत है कि उनकी जमीनों को सरदार सरोवर नर्मदा परियोजना, स्टेच्यू ऑफ यूनिटी और अन्य पर्यटन गतिविधियों के लिए जबर्दस्ती ले ली गई है।

जनसत्ता के अनुसार नर्मदा ज़िला के केवड़िया में आदिवासी संगठन के नेता डॉक्टर प्रफुल वसावा ने कहा, ‘यह परियोजना हमारे विनाश के लिए है, इसलिए उस दिन हम शोक मनाएंगे और 72 गांवों के किसी भी घर में खाना नहीं पकाया जाएगा।’

वसावा ने कहा, ’31 अक्टूबर को ‘बंद’ केवल स्कूलों, कार्यालयों या व्यावसायिक संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सभी घरों में भी (खाना ना पकाकर) विरोध किया जाएगा।’  वसावा का कहना है कि हमें गुजरात के महान सपूत सरदार पटेल से कोई विरोध नहीं है। लेकिन, इस सरकार के विकास की सोच एकतरफ़ा और आदिवासियों के हितों के ख़िलाफ़ है।

वसावा ने बताया कि इस आंदोलन को प्रदेश के लगभग 100 छोटे-बड़े आदिवासी संगठनों का समर्थन प्राप्त है। उत्तरी गुजरात के बनासकांठा से दक्षिणी गुजरात के डांग्स ज़िले तक 9 आदिवासी ज़िले बड़े पैमाने पर इस आंदोलन में हिस्सा लेंगे।

ज्ञात हो कि नर्मदा नदी के पास करीब 3400 मजदूर और 250 इंजीनियर मिलकर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को तैयार कर रहे हैं। इसके निर्माण में अब तक तकरीबन 2389 करोड़ रूपये खर्च किए जा चुके हैं।

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