कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मेरे पिता ने मोदी या राहुल के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए अपनी जान दी. क्या सैनिकों की चर्चा किए बिना चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है?- शहीद जवान की बेटी

शहीद जवान की बेटी अपूर्वा रावत ने कहा है कि भारतीय सेना को मोदी जी की सेना कहना उनके शहादत का अपमान है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भारतीय सेना को “मोदी जी की सेना” बताए जाने को लेकर पुलवामा हमले में शहीद  एक जवान की बेटी ने आपत्ति जताई है. शहीद जवान की बेटी ने कहा है कि मेरे पिता ने मोदी या राहुल के लिए नहीं, बल्कि देश के लिए अपनी जान दी. क्या सैनिकों की चर्चा किए बिना चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है? शहीद जवान की बेटी अपूर्वा ने कहा है कि अब सरकार और नेता उनका फ़ोन भी नहीं उठाते.

एचटीएन तिरंगा टीवी के एक कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त से बात करते हुए पुलवामा हमले में शहीद जवान की बेटी अपूर्वा रावत ने कहा, “मैं देश की दोनों बड़ी पार्टियों से आग्रह करती हूं कि वह सेना को राजनीति में ना घसीटें. आपलोग उनकी चर्चा क्यों नहीं करते जिनकी वज़ह से हमारे जवानों की मौत हुई है. आज बीजेपी की सरकार है तो मोदी जी की सेना बोल रहे हैं, कल अगर कांग्रेस की सरकार आएगी तो कहेंगे राहुल की सेना, मेरे विचार से इस तरह की बातें नहीं होनी चाहिए. भारतीय सेना भारत के लोगों के लिए लड़ रही है. मोदी जी भी भारतीय हैं, योगी जी भी भारतीय हैं. मुझे नहीं लगता कि सेना को राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए.”

अपूर्वा रावत ने आगे कहा, “आज सभी शहीद जवान जब इन नेताओं को देखते होंगे तो कहते होंगे कि हमने इसके लिए अपनी जान नहीं दी थी. राजनीति के लिए सेना का इस्तेमाल करना उनका अपमान है. आप (राजनीतिक दल) पूरी तरह से सेना का अपमान कर  रहे हैं. देश की सेना किसी खास राजनीतिक दल या व्यक्ति के लिए नहीं बनी है. आज मोदी प्रधानमंत्री हैं तो मोदी की सेना और राहुल  गांधी प्रधानमंत्री बन जाएं तो राहुल की सेना बोलने वाला प्रचलन सही नहीं है.”

शहीद जवान की बेटी ने आगे कहा, “मेरे पिता के शहीद होने से 13 दिन बाद तक सभी नेता हमारे घर आते थे. हमारे घर पर नेताओं का मेला लगा रहता था. लेकिन, आज कोई नेता हमारा फ़ोन नहीं उठाता. सभी नेता ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि चुनाव में व्यस्त हैं. सरकार को चुनाव से हटकर शहीद जवानों के परिवार वालों की सुध लेनी चाहिए.” उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई भी घटना होती है तो लोगों से इस्तीफ़ा मांगा जाता है, लेकिन पुलवामा हमले के बाद किसी का भी इस्तीफ़ा नहीं हुआ.

बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले में 40 से अधिक सीआरपीएफ़ जवानों की मौत होने के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक की थी. भारतीय जनता पार्टी के तमाम बड़े नेता इस एयर स्ट्राइक का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में लगे हैं. हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय सेना को “मोदी जी की सेना” बताया था, जिसके बाद विवाद बढ़ा हुआ है. मोदी सरकार में मंत्री और सेना के पूर्व अधिकारी जनरल वी.के सिंह ने हाल ही में कहा था कि सेना को मोदी जी को सेना बोलने वाला व्यक्ति देशद्रोही है.

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