कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मानवाधिकार कार्यकर्ता सुरेन्द्र गाडलिंग, महेश राउत, सुधीर धावले और रोना विल्सन यरवडा जेल में भूख हड़ताल पर

भूख हड़ताल में कार्यकर्ताओं ने यूएपीए हटाने, जेल में क़ैदियों के साथ होने वाले भेदभाव को ख़त्म करने, आदि की मांग की है।

इसी वर्ष जून में कथित माओवादी संपर्क के आरोप में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ़्तार 5 सामाजिक कार्यकर्ता, सुरेन्द्र गाडलिंग, महेश राउत, सुधीर धावले, रोना विल्सन एवं शोमा सेन में से चार लोग पुणे यरवडा जेल में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।

द वायर की एक रिपोर्ट के मुताबिक कार्यकर्ताओं का मुकदमा लड़ रहे वकील निहाल सिंह राठौर ने बताया कि चारों कार्यकर्ता हड़ताल पर बैठे हैं लेकिन अब तक यह साफ़ नहीं हो पाया है कि वे एक दिन की भूख हड़ताल पर हैं या अनिश्चितकालिन हड़ताल पर हैं। फिलहाल इस बात की भी पुष्टि नहीं हुई है कि महिला सेल में बंद शोमा सेन भी भूख हड़ताल पर बैठी हैं या नहीं।

कबीर कला मंच द्वारा जारी किए गए संदेश में कहा गया है कि इन कार्यकर्ताओं को जेल में किताबें नहीं मिल रही हैंजो उनके लिए मानसिक प्रताड़ना के समान है। इस मामले में जेल प्रशासन का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

एक वरिष्ठ जेल अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “आरोपियों ने इस बारे में जेल अधिकारियों से कोई शिकायत नहीं की है। भूख हड़ताल के बारे में भी उनके द्वारा कुछ नहीं बताया गया है मानसिक प्रताड़ना का आरोप गलत है। उन्हें कानून के मुताबिक सुविधाएं दी जा रही हैं।

राठौर ने बताया कि चारों कार्यकर्ता विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं जिसमें विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम (यूएपीएहटाने और जेल में कैदियों के साथ जातिधर्म को अलग रखकर मानवीय व्यवहार करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

गौरतलब है कि कबीर कला मंच और रिपब्लिकन पैंथर्स के कार्यकर्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने वाले क्रांतिकारी जतिन दास की बरसी के दिन ही कार्यकर्ताओं ने हड़ताल शुरु की थी। जतिन दास की मौत तकरीबन 60 दिनों से भूख हड़ताल के बाद 13 सितंबर 1929 को लाहौर जेल में हुई थी।

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