कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

धार्मिक भेदभाव के कारण अपनी नौकरी छोड़ने पर मजबूर हुए सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के सत्याग्रह का एक महीना पूरा

नौकरी छोड़ने से पहले, अमान खान को महीनों अपने धार्मिक अभ्यास और धर्म-सांकेतिक वेशभूषा के लिए उत्पीडित किया गया था।

कनाडा की पुणे में स्थित एमएनसी, ईएक्सएफओ में धार्मिक भेदभाव के कारण 37 वर्षीय सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल अमान खान को मजबूरन अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी और इसलिए वे बीते 15 अगस्त से सत्याग्रह पर बैठे हैं। एमएनसी में अमान खान के तत्कालीन प्रबंधक किशोर कोटेचा उनके धर्म-सांकेतिक वेशभूषा और उनके धार्मिक परम्पराओं को लेकर उन्हें उत्पीडित करते थे। टू सर्कल्स की एक रिपोर्ट के अनुसार जब अमान ने अपने संवैधानिक अधिकारों की बात करने की कोशिश की तो कोटेचा ने उनसे कहा कि कार्यालय में धर्म का अभ्यास करना कंपनी की नीति के ख़िलाफ़ है।

लंबे समय तक उत्पीड़न का सामना करने के बाद अमान खान को काम छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कनाडा में ईएक्सएफओ मुख्यालय को पत्र लिखा लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला है। खान ने भारत के श्रम आयोग और पुणे ज़िला कलेक्टर के कार्यालय से भी संपर्क किया।

निष्क्रिय प्रतिरोध के गांधीवादी मॉडल के समर्थक अमान खान ने एक महीने पहले अपना सत्याग्रह शुरू किया था। उन्हें मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा भी समर्थन प्राप्त हो रहा है। जमीयत उलमा के शाहिद नदीम ने अमान खान के समर्थन में भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। उन्होंने अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से भी इस विषय में समर्थन करने का आग्रह किया है।

गौरतलब है कि अमान खान, 12 लोगों के परिवार में इकलौते नौकरीपेशा थे और सभी उन पर आर्थिक रूप से आश्रित हैं। ऐसी स्थिति में वे जून, 2018 से नौकरी पर नहीं है। उनकी मांग है कि कंपनी इस प्रकार के भेदभावपूर्ण नीतियो के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे और उन्हें वापस नौकरी पर बहाल करे।

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