कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सेना के लिए हथियार बनाने वाली कंपनियों पर लगे ताले, निगमीकरण के विरोध में हड़ताल पर गए कर्मचारी

ओएफबी के तहत आने वाली 41 आयुध निर्माण कंपनियों के 82,000 से अधिक कर्मचारी  पिछले महीने से चरणबद्ध हड़ताल पर हैं.

पुणे के तीन प्रमुख रक्षा विनिर्माण इकाइयों के 7,000 से अधिक कर्मचारी मंगलवार की सुबह से हड़ताल पर चल गए जिससे उत्पादन संबंधी सारे काम ठप हो गए हैं. दरअसल, यह हड़ताल सरकार द्वारा प्रस्तावित आयुध कारखाना बोर्ड(ओएफबी) के निगमीकरण के विरोध में है. ओएफबी के तहत आने वाली 41 आयुध निर्माण कंपनियों के 82,000 से अधिक कर्मचारी  पिछले महीने से चरणबद्ध हड़ताल पर हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार खड़की की एम्मुनिशन और हाई एक्सोप्लोसिव्स फैक्ट्री में, साथ ही पूणे की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में सुबह 7 बजे हड़ताल शुरु हो गई. इसमें अधिकतर कर्मचारी ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन (AIDEF), इंडियन नेशनल डिफेंस वर्कर्स फेडरेशन (INDWF)  और भारतीय प्रतिहार मजदूर संघ (BPMS), जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के भारतीय मजदूर संघ (BMS) का हिस्सा है, से संबंधित हैं.

हड़ताल को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात कर दिया है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में तीनों यूनियनों के महासचिवों ने कहा, ”इस प्रकार के आयुध कारखानों को निगम या पीएसयू बना देने से 82,000 से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों के सदस्यों का भावी जीवन बर्बाद हो जाएगा. इनमें 44,000 कर्मचारी जनवरी 2004 के बाद ज्वाइन किए हैं, जिनकी उम्र 25 से 40 वर्ष की है. वे सभी उम्मीद और आकांक्षाओं के साथ इन कंपनियों में भर्ती हुए हैं. इनसे पहले ही पेंशन का अधिकार भी छीन लिया गया है. अब वर्तमान में मिलने वाली मिलने वाले आय से ही आगे का भविष्य निश्चित करेंगे. अब उन्हें भी किसी तहर परेशान किया जाएगा जिनकी कोई गलती नहीं है. प्रतिभाशाली युवा अधिकारी और कार्यकर्ता सभी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में और रक्षा में आत्मनिर्भता हासिल करने के लिए ओएफबी के निगमीकरण के निर्णय को वापस लिया जा सकता है.”

निगमीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने देशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है. जबलपुर के आर्डिनेंस फैक्ट्री में मंगलवार सुबह से ताले लटके हैं.

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