कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

पंजाबी यूनिवर्सिटी में लड़कियों ने होस्टल के गेट नहीं बल्कि पितृसत्ता की कमर तोड़ी है!

विश्वविद्यालय के कुलपति बेशक इन लड़कियों को यूनिवर्सिटी के नियमानुसार रात को हॉस्टल से निकलने की आज़ादी ना दें। लेकिन, गुरुवार की रात पंजाबी यूनिवर्सिटी में जो कुछ हुआ,वह इस बात का सबूत है कि लड़कियां मैदान में हैं और अपने हक़ों की भीख नहीं मांग रही बल्कि छीन रही हैं। 

गुरुवार की रात ख़बर आई कि पंजाब की पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में रात को लड़कियों ने हॉस्टल के गेट तोड़ दिए। गेट तोड़ने के बाद सभी हॉस्टल से बाहर आ गईं। बाहर आकर यूनिवर्सिटी प्रशासन और पितृसत्ता के ख़िलाफ़ नारे लगाने लगीं। लड़कियों ने ऐसा अचानक ही नहीं किया है, बल्कि यह उनके हॉस्टल कर्फ़्यू के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन का हिस्सा है।

कौन-सा आंदोलन कर रही हैं छात्राएं? 

तारीख़ 18 सिंतबर, साल 2018।  कैंपस में शाम के वक़्त डेमोक्रेटिक स्टूडेंट ऑर्गेनाईजेशन के लड़के-लड़कियां इक्कठा होते हैं। इक्कठा होने के बाद सभी में सहमति बनती है कि लिंगभेद के चलते लड़कियों को 6 बजे हॉस्टल में बंद करने के नियम के खिलाफ एक मार्च निकाला जाए और लड़कों के तरह ही लड़कियों के हॉस्टल को 24 घंटे खोलने की मांग की जाए।

इक्कठा हुए स्टूडेंट्स “पितृसत्ता की कब्र खुदेगी पीपुपी की धरती पे, इंक़लाब ज़िंदाबाद और हॉस्टल के कर्फ्यू टाइम से हमें चाहिए आज़ादी” के नारे लगाते हुए लड़कियों के हॉस्टल की तरफ मार्च करने लगते हैं। मार्च जब लड़कियों के हॉस्टल के पास पहुंचा तो सैकड़ों लड़कियां अपनी आज़ादी के लिए इसमें शामिल हुईं। लड़कियों की बढ़ती तादाद देख, वहां मौजूद दक्षिणपंथी छात्रसंगठन SAP  ने लड़कियों के साथ मार्च कर रहे लड़कों पर हमला कर दिया। लेकिन इससे न उन लड़कियों के हौसलें कम हुए जो अपनी आज़ादी के लिए मार्च में शामिल थीं और न ही उन लड़कों के, जो पितृसत्ता के खिलाफ़ लड़कियों के साथ खड़े थे। उससे अगले ही दिन लड़कियों के हॉस्टल को 24 घण्टे खुला रखने और कई अन्य मांगों के साथ छात्र कुलपति दफ़्तर के सामने धरने प्रदर्शन पर बैठ गए।

धरने पर बैठी छात्राएं

इस धरने में DSO के साथ PSU, PRSU, PSU-LALKAAR, AISF और कई दूसरे प्रगतिशील संगठन भी शामिल हो गए। पुलिस ने वहां बैठे 13 लड़कों पर मारपीट और जान से मारने के प्रयास का केस दर्ज कर दिया। पुलिस केस होने के बाद भी प्रदर्शन कर रहे छात्र डटे रहे। छात्र अपना आंदोलन चेन भूख हड़ताल से शुरू करते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से कोई जवाब न आने पर छात्र अपने आंदोलन को तेज़ करते हैं। इसके बाद 1 अक्टूबर को 3 लड़कियां और 2 लड़के आमरण अनशन पर बैठ जाते हैं। आमरण अनशन पर बैठी तीनों लड़कियों की हालत अभी खराब है और उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

अस्पताल में भर्ती छात्राएं

इस आंदोलन में सक्रिय छात्रा सुरवीर ने न्यूज़सेंट्रल24×7 को अपनी बातचीत में बताया, “हमारा समाज बदल रहा है और वह पुरानी सड़ चुकी धारणाओं को भी बदल रहा है। पंजाबी यूनिवर्सिटी में लड़कियों द्वारा हॉस्टल का ताले तोड़ा जाना इसी बदलाव का हिस्सा है। हम लैंगिक बराबरी के आधार पर बस इतना कह रहे हैं कि लड़कों की तरह हमारे लिए भी हॉस्टल 24 घण्टे खुला होना चाहिए। रात को हम लड़कियां जो लैंगिक बराबरी के नारे लगा रही थीं, वे सिर्फ हमारी आज़ादी तक सीमित नहीं है। बल्कि पूरे समाज में महिलाओं को दोयम दर्जे का समझे जाने वाले विचारों पर करारा प्रहार है। हमें जबरन हॉस्टल में बंद कर दिया था, इसलिए हमने विरोध में हॉस्टल गेट तोड़ दिए और फिर बाहर निकलकर खुले आसमां में साँस ली।”

Students of Punjabi University in Patiala have been demanding that curfew from campus be removed and the women's hostel be open 24/7.

होस्टल गेट और पितृसत्ता में कैद होकर नहीं रहना चाहती पंजाबी यूनिवर्सिटी की लड़कियां! (वीडियो:मनदीप पूनिया)

NewsCentral24x7 ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಅಕ್ಟೋಬರ್ 4, 2018

पितृसत्ता के खिलाफ पंजाबी यूनिवर्सिटी की लड़कियां अलग-अलग ढंग से आंदोलन कर रही हैं। जिस लाइब्रेरी के रीडिंग रूम के दरवाजे रात के वक़्त लड़कियों के लिए बंद रहते थे। आज वही रीडिंग रूम रात में लड़कियों के पढ़ने बैठने से ज़िंदा हो गया है। हालांकि प्रशासन ने लड़कियों को रात में रीडिंग रूम जाने से रोका भी। लेकिन, अपने मज़बूत इरादों के साथ लड़कियों ने उसे फ़तेह कर लिया।

रात के समय रीडिंग रूम में पढ़ाई करती लड़कियां

आंदोलन पर अपना पक्ष रखते हुए पंजाबी यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. बी.एस. घुम्मन का कहना है कि छात्रों के साथ उनकी बातचीत लगातार चली है। छात्रों को जिद नहीं करनी चाहिए क्योंकि लड़कियों का हॉस्टल 24 घंटे तक खुला रखना किसी भी तरह से संभव नहीं हैं। इस मामले में प्रशासनिक, सामाजिक, सुरक्षा, कानूनी और मां-बाप के पक्ष को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। कई छात्र संगठन भी लड़कियों के हॉस्टल को 24 घंटे खोलने के विरुद्ध हैं। कई बार हमने धरने पर बैठे बच्चों को समझाने का प्रयास किया है, लेकिन वे मान नहीं रहे हैं। हम किसी भी तरह यूनिवर्सिटी और लड़कियों की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाल सकते।”

विश्वविद्यालय के कुलपति बेशक इन लड़कियों को यूनिवर्सिटी के नियमानुसार रात को हॉस्टल से निकलने की आज़ादी ना दें। लेकिन, गुरुवार की रात पंजाबी यूनिवर्सिटी में जो कुछ हुआ,वह इस बात का सबूत है कि लड़कियां मैदान में हैं और अपने हक़ों की भीख नहीं मांग रही बल्कि छीन रही हैं।

 

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