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मोदी सरकार ने दसॉल्ट को ज़्यादा पैसा दिया, जो कई सवाल खड़े करता है- पी चिदबंरम

पी चिदबंरम ने कहा कि मोदी सरकार ने वायुसेना की जरूरत को नकारते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया है.

राफ़ेल सौदे को लगातार एक के बाद नए खुलासे हो रहे हैं. कांग्रेस पहले से ही सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाती रही है, द हिंदू के वरिष्ठ पत्रकार एन. राम की हालिया रिपोर्ट ने इस डील को लेकर मोदी सरकार को मुश्किलों में डाल दिया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा है कि मोदी सरकार ने राफ़ेल सौदे में देश के साथ अन्याय किया है.

शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पी. चिदंबरम ने जेपीसी जांच की मांग को दोहराया और कहा कि केंद्र सरकार ने 126 विमानों के बजाय 36 विमानों का सौदा करके देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के समझौता किया है.

पूर्व वित्त मंत्री ने आगे कहा कि फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट को ज्यादा पैसे देने का फ़ैसला जान बूझकर लिया गया था और इससे काफ़ी सवाल खड़े होते हैं.

नेशनल हेराल्ड की ख़बर के अनुसार उन्होंने कहा कि सरकार ने देश को दो तरीके से अन्याय किया है. पहला यह कि सरकार ने वायुसेना की जरूरत को नकारते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता किया है जिसकी वायुसेना को सख्त जरूरत थी. दूसरा यह कि सरकार ने दो स्कवाड्रन खरीदे हैं जिनकी कीमत प्रति विमान लगभग 25 मिलियन से ज्यादा होगी. 2016 की विनियम दर के हिसाब से 25 मिलियन 186 करोड़ के बराबर है. यानी भारत प्रति विमान के लिए 186 करोड़ रुपए का भुगतान करेगा.

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि 126 की बजाय 36 विमान खरीदने का फ़ैसला पीएम मोदी द्वारा लिया गया है. ज्ञात को कि द हिंदू की एक रिपोर्ट में शुक्रवार को बताया था कि पीएम मोदी द्वारा 126 विमानों के बजाय 36 राफ़ेल खरीदने के फ़ैसले ने प्रति विमान की कीमत को 41.42 फीसदी तक बढ़ा दिया.

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