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राफ़ेल मामले में मोदी सरकार का रोचक यू-टर्न, अटॉर्नी जनरल ने कहा- रक्षा मंत्रालय से नहीं चोरी हुए कागजात

अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल ने बीते बुधवार को कहा था कि राफ़ेल से जुड़े कागज रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं.

राफ़ेल मामले को लेकर मोदी सरकार एक बार फिर रोचक यू-टर्न  लिया  है. अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल ने बीते शुक्रवार को यू-टर्न लेते हुए कहा कि राफ़ेल से जुड़े कागज रक्षा मंत्रालय से चोरी नहीं हुए हैं. बल्कि याचिकाकर्ताओं ने मूल कागजों की फोटोकॉपी का उपयोग किया है.

जनसत्ता की ख़बर के अनुसार अटॉनी जनरल के.के वेणुगोपाल ने कहा कि राफ़ेल से जुड़े कागज रक्षा मंत्रालय से चुराए नहीं गए और अदालत में उनके कहने का मतलब यह था कि याचिकाकर्ताओं ने आवेदन में मूल कागजातों की फोटोकॉपियों का इस्तेमाल किया है. जिन्हें सरकार की ओर से गोपनीय माना गया है.

ग़ौरतलब है कि बीते बुधवार को अटॉनी जरनल ने अपनी टिप्पणी से सभी को चौंका दिया था. उन्होंने कहा था कि राफ़ेल सौदे से जुड़े कागज रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं. जिसके बाद राजनीतिक गरियारों में हंगामा शुरू हो गया था.

सियासी हंगामा तेज़ होने पर के.के वेणुगोपाल ने स्थिति को संभालने की कोशिश करते हुए कहा, ‘‘मुझे बताया गया कि विपक्ष ने आरोप लगाया है कि (उच्चतम न्यायालय में) दलील दी गई है कि रक्षा मंत्रालय से फाइलें चोरी हो गईं. फाइलें चोरी होने का बयान पूरी तरह से गलत है.’’

अटॉनी जरनल ने कहा कि राफ़ेल सौदे की जांच पर पुर्निवचार की मांग वाली यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण की याचिकाओं में ऐसे तीन दस्तावेजों को जोड़ा गया है जो असली दस्तावेजों की फोटो कॉपी हैं.

हालांकि आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि अटॉर्नी जनरल द्वारा ‘चोरी’ शब्द का इस्तेमाल संभवत: ‘‘ज्यादा सख्त” था और इससे बचा जा सकता था. ग़ौरतलब है कि सरकार ने ‘द हिन्दू’ अखबार को इन दस्तावेजों के आधार पर लेख प्रकाशित करने पर गोपनीयता कानून के तहत मामला दर्ज करने की चेतावनी भी दी थी.

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