कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

देश की वायु सेना, हमारे फाइटर पायलट्स, देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है राफेल घोटाला

दिलचस्प बात यह कि अपने को भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा योद्धा और सिपाही कहने वाले मोदीजी अब तक मौन धारण किए हुए हैं।

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राजनैतिक गलियारों में इन दिनों राफेल डील की चर्चा ज़ोरों पर है। जहाँ कांग्रेस इस डील को लेकर लगातार हमलावर बनी हुई है और इसे बहुत बड़ा घोटाला बता रही है वहीं भाजपा इस पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेल रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि अपने को भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा योद्धा और सिपाही कहने वाले मोदीजी अभी तक मौन धारण किए हुए हैं।

क्या राफेल डील सच में घोटाला है? क्या मोदी, भाजपा और अंबानी ने मिलकर भ्रष्टाचार किया है? क्या राफेल डील देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है? इन बातों को समझने से पहले आपको जानना होगा कि “राफेल” क्या है? राफेल डील की ज़रुरत क्यों पड़ी? तो आइए एक एक कर समझते हैं।

यूपीए II के समय भारतीय वायु सेना ने तत्कालीन सरकार से नए लड़ाकू विमान खरीदने की इच्छा जताई। सरकार ने वायु सेना की ज़रूरतों के मद्देनजर “राफेल” विमान खरीदने का निर्णय किया जो कि एक फ्रांसीसी लड़ाकू विमान है और जिसे फ्रांस की कंपनी “दस्सॉल्ट” बनाती है। यह करार भारत सरकार ने फ्रांस सरकार से मिलकर भारतीय कंपनी “HAL” एवं फ्रांसीसी कंपनी डिसाल्ट के बीच कराया था। उस समय 126 राफेल विमान खरीदने का निर्णय “ट्रान्सफर टू टेक्नॉलोजी” के साथ किया गया था और प्रति विमान 526 करोड़ रू मूल्य तय किया गया था। इससे पहले कि राफेल डील परवान चढ़ता, 2014 में यूपीए की सरकार सत्ता से हट गई और केन्द्र में मोदी सरकार का गठन हुआ फिर आगे की कहानी सबको पता है।

विवाद की शुरूआत:
अप्रैल 2015 का समय था, मोदीजी फ्रांस की यात्रा पर जाने वाले थे और वहीं डील फाइनल होना था। मोदीजी फ्रांस गए और 126 राफेल विमान की जगह 36 पूरी तरह बने विमानों का डील कर आए, वो भी बीना ‘ट्रान्सफर टू टेक्नॉलोजी’ के। इस दौरान कई चौंकाने वाले कार्य उन्होंने किए जो निम्न हैं:
1. HAL से करार छीनकर अंबानी के रिलायंस को दे दिया।
2. 526 करोड़ रू प्रति विमान का मूल्य बढ़ाकर 1611 करोड़ प्रति विमान कर दिया।
3. अपने साथ अनिल अंबानी को साथ ले गए जबकि रक्षा मंत्री गोवा में मछली खरीद रहे थे।
4. उन्होंने ‘कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्युरिटी’ से न सिफारिश ली न उनसे पूछा।

यहीं से विवाद का जन्म होता है और कांग्रेस सहित विपक्ष मोदी सरकार पर तब से आरोप लगाते आ रहे हैं कि ये राफेल डील एक घोटाला है। कांग्रेस लगातार मोदी सरकार से पूछ रही है कि HAL से 30000 करोड़ का ठेका छीनकर मोदीजी ने अपने मित्र अंबानी को क्यों दिया? 526 करोड़ प्रति विमान के बदले 1611 करोड़ प्रति विमान क्यों दिया? लेकिन कांग्रेस, राहुल गाँधी के सवालों का जबाव देने के बजाय मोदीजी मौन धारण किये हुए हैं और कभी कानून मंत्री से तो कभी कृषि मंत्री से प्रेस कांफ्रेंस करवा कर सीधा जबाव देने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेल रहे हैं।

इस कड़ी में नया मोड़ उस समय आ गया जब 21 सितंबर 2018 को फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रास्वां ओलांद ने कहा कि हमारे पास रिलायंस के अलावा कोई दूसरा विकल्प मोदी सरकार ने नहीं दिया था। यहाँ तक कि रिलायंस से डील करो नहीं तो डील नहीं होगी। ओलांद के इस बयान से भारत की राजनीति जहां एक बार फिर गरमा गयी है वहीं राफेल डील का घोटाला होने की विपक्ष की बात को मज़बूत भी करती है।

(पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रास्वां ओलांद का वो बयान)

 

मोदी, भाजपा एवं अंबानी की लूट:
मित्रों सबसे अहम सवाल यह है कि 526 करोड़ के बदले मोदीजी ने 1611 करोड़ क्यों दिया? HAL के बदले रिलायंस को ठेका क्यों दिया? ज्ञातव्य हो कि HAL की स्थापना 23 दिसंबर 1940 को हुई थी और तब से अब तक 78 वर्षों तक इसका विमान बनाने का लंबा इतिहास रहा है। लेकिन रिलायंस, लड़ाकू विमान तो छोड़ो कभी विमान का एक स्क्रू भी नहीं बनाया बावजूद इसके मोदीजी ने HAL की जगह सारे कानून ताक पर रखकर रिलायंस को ठेका दिलवा दिया। इसके अलावे 526 करोड़ की जगह दाम भी 1611 करोड़ प्रति विमान दिया।

(रिलायंस डिफेंस लिमिटेड की स्थापना)

 

अब आप खुद सोचें यह भ्रष्टाचार या घोटाला नहीं तो क्या है? थोड़ी देर के लिए पार्टी पोलिटिक्स से हटकर एक आम भारतीय के रूप में सोचें कि जो कंपनी कभी विमान नहीं बनाई वो लड़ाकू विमान कैसे बनाएगी? सरकार यदि सड़क भी बनवाती है तो उसके लिए टेंडर निकालती है, अनुभव मांगती है। लेकिन यह तो देश की वायु सेना की बात है, हमारे फाइटर पायलट्स की बात है, देश की सुरक्षा की बात है। क्या मोदी एवं भाजपा सरकार को अपने राजनैतिक चंदे एवं अंबानी से मित्रता निभाने के लिए देश की सुरक्षा को नजरअंदाज करना चाहिए? मैं समझता हूँ कि राफेल डील एक बहुत बड़ा घोटाला है जिसे मोदी, भाजपा और अंबानी ने मिलकर अंजाम दिया है। देशहित में मोदीजी को इस पर जबाव देना चाहिए और इस डील की निष्पक्ष जाँच ज्वाइंट पार्लियामेंटरी कमिटी से करानी चाहिए।

!! जय हिन्द !!

विश्वास आजाद हैं।

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