कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राफ़ेल घोटाला: जेपीसी की मांग पर एकजुट विपक्ष, सीपीएम बोली- मेघनाद की तरह छिप कर लड़ाई लड़ रहे हैं नरेन्द्र मोदी

पहली बार 7 विपक्षी दलों के सांसद एक साथ मिलकर राफ़ेल सौदे पर जांच की मांग कर रहे हैं.

राफ़ेल विमान घोटाले पर मोदी सरकार विपक्ष से पूरी तरह घिर गई है. विपक्षी दलों के सांसद इस मामले में जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) से जांच कराने की मांग कर रहे हैं.

राफ़ेल सौदे पर अभी तक चुप्पी साधे बीजू जनता दल भी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ खड़ी हो गई है. पार्टी के सांसद कैलाश नारायण सिंह देव ने कहा है कि राफ़ेल सौदे में सवाल जस के तस बने हुए हैं. विमानों के दामों का सरकार बचाव नहीं कर सकी है. यही विमान कतर ने कम दाम में खरीदा जबकि मोदी सरकार ने पिछले दामों पर कई गुना बढ़ाकर यह सौदा तय किया है. इस डील पर संदेह है और सांसदों को इस पर चुप नहीं रहना चाहिए.

न्यूज़18 की ख़बर के मुताबिक बीजद सांसद ने कहा कि इस सौदे में भारत को राफ़ेल बनाने की तकनीक नहीं देने के कारण देश को बड़ा नुकसान हुआ है. राफ़ेल सौदा एनडीए के लिए बाद में बहुत विकराल रूप धारण करने वाली है.

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने भी राफ़ेल घोटाले पर जेपीसी जांच की मांग की.  उन्होंने कहा कि आज संसद में अरूण जेटली सवालों का जवाब नहीं दे सके हैं. हम कांग्रेस के पिछले घोटाले के बारे में सुनने के लिए संसद में नहीं आए हैं. उन्होंने जिस तरह रामायण में मेघनाद बादलों के पीछे छिप कर लड़ाई करता था, उसी तरह नरेन्द्र मोदी अरूण जेटली के पीछे छिप गए हैं.

सीपीआई एम सासंद मो. सलीम ने कहा कि सब लोग देश की रक्षा के लिए खुद पर भरोसा करते हैं (सेल्फ-रिलायंस) जबकि मोदी सरकार की दिलचस्पी अपनी सरकार और रिलायंस (सेल्फ एंड रिलायंस) को बचाने के लिए है. उन्होंने राफ़ेल घोटाले को ऑपरेशन कवर अप (छिपाने का अभियान) बताया.

तेलुगु देशम पार्टी के सांसद जयदेव गल्ला ने भी इस सौदे में सरकार की संदेहास्पद भूमिका की आलोचना की और जेपीसी जांच की मांग की. बुधवार को पहली बार लोकसभा में सात दलों के सांसदों ने राफ़ेल विमान सौदे में जांच की मांग की.

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