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कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना को रघुराम राजन ने बताया सही फ़ैसला, कहा- ग़रीबी हटाने में मिलेगी मदद

रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने हाल ही में कई टीवी चैनलों को दिए अपने साक्षात्कार में ये बातें कही है.

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एचटीएन, इटी नाउ, एनडीटीवी, सीएनबीसी टीवी-18 जैसे कई टीवी चैनलों को हाल ही में साक्षात्कार दिया है. इसमें रघुराम राजन ने लोकसभा चुनाव, राष्ट्रवाद, कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना (NYAY), रोजगार सहित कई मुद्दों पर अपनी राय रखी.

रघुराम राजन के इन साक्षात्कारों के महत्वपूर्ण बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:

  • राष्ट्रवाद और लोकलुभावनवाद पर रघुराम राजन ने कहा कि मेरी चिंता यह है कि जब एक पक्ष दूसरे पक्ष की तुलना में अधिक प्रभावी होता है तो हम संतुलन नहीं बना पाते. एक देश के रूप में हमें बहस में निष्पक्षता की जरूरत हैं. एक-दूसरे के दृष्टिकोण के लिए सम्मान की आवश्यकता है.  हमें सहिष्णुता की ज़रूरत है.”
  • “लोकलुभावनवाद पर रघुराम राजन ने कहा कि यह अभिजात वर्ग पर उंगली उठाते हुए कह रहा है कि आपने पर्याप्त काम नहीं किया है. लोकलुभावनवाद को पसंद करने वाले लोग वामपंथी हो सकते हैं, जो कहते हैं कि समस्या की जड़ अमीर हैं. दूसरी तरफ़ दक्षिणपंथी लोग जो लोकलुभावनवाद को पसंद करते हैं, उनका कहना है कि समस्या अल्पसंख्यकों और प्रवासियों से है, इसलिए उन्हें काबू में करें.”

नौकरी:

  • “हमारे पास आईआईएम जैसे प्रमुख संस्थानों से पढ़कर निकलने वाले लोगों के लिए बहुत अच्छी नौकरियां हैं. लेकिन, सामान्य स्कूल और कॉलेजों से पढ़कर निकलने वाले अधिकांश छात्रों के लिए स्थिति दूसरी है.”
  • “हम एक तकनीकी क्रांति का सामना कर रहे हैं. जो नौकरी और आय प्राप्त करने की हमारी क्षमता को बदल रहा है. मध्यम वर्ग के लिए नौकरी पाना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है.”
  • “जब आप समझ जाते हैं कि सिस्टम नौकरियां प्रदान नहीं कर रहा है तब आप चितिंत होते हैं, और उस समय आप दोष देने के लिए लोगों को देखने लगते हैं.”
  • “युवा नौकरी तलाश में हैं. भारत में अच्छी नौकरी पाने के लिए लोगों में भूख है. देश में बेरोजगारी की तरफ़ पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. यदि वास्तविक प्रमाणों को देखें तो रेलवे की 90 हज़ार नौकरियों के लिए ढाई करोड़ लोगों ने आवेदन किया. यह नौकरियों की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है”
  • “भारत में हमें ख़ुद ही रोजगार सृजन के बारे में सोचना होगा. जिससे अच्छे रोजगार का सृजन कर युवाओं को मौका दिया जा सके.”

आंकड़ों पर रघुराम राजन की राय:

  • “बेरोजगारी का आंकड़ा लंबे समय से बहुत ही ख़राब है. हमे इसे सुधारने की आवश्यकता है. हम ईपीएफओ के आंकड़ों पर यकीन नहीं कर सकते. हमें रोजगार का बेहतर डेटा जुटाने की आवश्यकता है. यह कहना अर्थहीन होगा कि लोग नौकरी नहीं चाहते हैं. बल्कि देश में रोजगार को लेकर कई आंदोलन दर्शाते हैं कि युवा नौकरियों की तलाश में है. खासकर सरकारी नौकरियों की तलाश की जा रही है, क्योंकि इसमें सुरक्षा की गारंटी होती है. हमें आंकड़ों पर साफ़ और स्वतंत्र नज़रिया रखने की आवश्यकता है.”
  • देश की प्रमुख संस्थाओं की स्वतंत्रता:
  • “मुझे विभिन्न संस्थानों के बोर्ड में राजनीतिक दलों के लोगों के आने से मुझे कोई समस्या नहीं है. लेकिन यदि संस्थान पर राजनीति हावी हो जाए, तो मुझे डर है कि हमारे संस्थान और बोर्ड असंतुलित हो जाएंगे.”

नोटबंदी:

  • रघुराम राजन ने कहा, ” नोटबंदी का उद्देश्य लोकलुभावन था, लेकिन इसका परिणाम गरीब जनता के लिए बहुत हानिकारक साबित हुआ.”
  • उन्होंने कहा, “इस फ़ैसले पर पीछे मुड़कर देखना जरूरी है कि कैसे नोटबंदी का फ़ैसला लिया गया था. सरकार ने इससे क्या सीखा है? नोटबंदी के वास्तविक आंकड़ों के आधार पर हमें स्व-मूल्यांकन की आवश्यकता है. सरकार को यह समझने की आवश्यकता है कि क्या नोटबंदी से कुछ सुधार हुआ है या नहीं”

कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना:

  • “मैं ग़रीबी उन्मूलन के लिए इस तरह से प्रत्यक्ष नगद लाभ के पक्ष में हूं. प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) फायदेमंद है. यह योजना लाभार्थी को सशक्त बनाता है.”
  • उन्होंने कहा कि, “इस योजना का डिटेल क्या होगा, यह मायने रखता है. यह योजना एक ऐड-ऑन की तरह होगी या अभी जो मौजूदा सब्सिडी हैं, उसके विकल्प के तौर पर? इस योजना को हम ग़रीबों तक कैसे लेकर जाएंगे? हमने समय समय पर देखा है कि लोगों के खाते में सीधे पैसा देना, उन्हें सशक्त बनाने का एक तरीका है. वे उस पैसे का इस्तेमाल अपनी जरूरत के सेवाओं के लिए कर सकते हैं. हमें यह समझने की ज़रूरत है कि इस योजना को किन योजनाओं या सब्सिडी के विकल्प के तौर पर स्थापित किया जाएगा. ”
  • इस योजना के लिए पैसों की व्यवस्था दूसरी योजनाओं में अतिरिक्त ख़र्चे को रोककर तथा टैक्सों को बढ़ा कर की जा सकती है.
  • “यह महत्वपूर्ण है कि ग़रीबों को दी जानी वाली इस योजना के लाभ से वह आलसी न बन जाएं और नौकरी की तलाश करना छोड़ दें. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि इसकी सहायता से वह बेहतर अजीविका पा सकें.”

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