कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राहुल गांधी ने गरीबों को निश्चित आमदनी देने का किया ऐलान, ग़रीबों को कैसे होगा फ़ायदा, यहां समझिए

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हर परिवार को मासिक 1500- 1800 रुपए देने पर विचार कर रही है.

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी पूरे दमखम के साथ उतरना चाहती है. इसलिए पार्टी ने मोदी सरकार से तू डाल डाल मैं पात पात की बाज़ी लगा रखी है. हाल ही में मोदी सरकार द्वारा सवर्णों का दस फ़ीसदी आरक्षण देने का वादा करने के बाद पार्टी ने  प्रियंका गांधी को उतार दिया. उसके बाद सरकार ने योजना बनाई थी कि किसानों को एक निश्चित राशि नकद के रूप में देगी, इसकी घोषणा होने से पहले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 28 जनवरी को छत्तीसगढ़ की एक रैली में बड़ा ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार बनने के बाद देश के ग़रीब परिवारों को एक निश्चित न्यूनतम आमदनी दी जाएगी, यानि सरकार ग़रीबों को एक निश्चित राशि देगी. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हर परिवार को मासिक 1500- 1800 रुपए देने पर विचार कर रही है.

राहुल ने क्या कहा?

राहुल गांधी छत्तीसगढ़ के रायपुर में भूपेश बघेल सरकार द्वारा किसानों की क़र्ज़माफ़ी और न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र देने पहुंचे थे. इस सभा में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने कहा, “हिन्दुस्तान के हर ग़रीब व्यक्ति को 2019 के बाद कांग्रेस पार्टी वाली सरकार गारंटी करके न्यूनतम आमदनी देने जा रही है, इसका मतलब हिन्दुस्तान के हर ग़रीब व्यक्ति के बैंक अकाउंट में कम से कम न्यूनतम आमदनी देने जा रही है. हम दो हिन्दुस्तान नहीं चाहते हैं, एक हिन्दुस्तान होगा और उस हिन्दुस्तान में हर ग़रीब व्यक्ति को मिनियम इनकम देने का काम कांग्रेस पार्टी वाली सरकार करेगी. यह काम आज तक दुनिया की किसी सरकार ने नहीं किया था, 2019 में बनने वाली कांग्रेस की सरकार इसे करने जा रही है.

क्यों जरूरी है हर गरीब को इनकम स्कीम की गारंटी?

देश का एक बड़ा वर्ग अब भी ग़रीबी में जी रहा है. पिछले साल जुलाई महीने में पूर्वी दिल्ली के मंडावली में तीन बच्चों की मौत हो गई थी. सितंबर 2017 में ख़बर आई थी कि झारखंड के सिमडेगा में भूख के कारण 11 साल के बच्ची की जान चली गई थी. द वायर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से 2018 के बीच करीब 47 लोगों की मौत भूख की वजह से गई थी. हालांकि दिसंबर 2018 में लोकसभा में सरकार ने कहा था कि उसके पास भूख से मरे लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

ऐसे में जब देश का एक वर्ग भूख से दम तोड़ रहा हो, सरकार की तरफ से आर्थिक मदद उन्हें काफी राहत दे सकती है.

मुश्किल है इसे लागू करने की राह?

न्यूनतम आमदनी को लागू करने में देश की वित्तीय स्थिति की कमजोरी एक बाधा माना जा रहा है. कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार राशन या अन्य सरकारी सुविधाओं को रोक सकती है. लेकिन, 2016 में आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रह्मण्यम ने सरकार को इसे लागू करने की सलाह दी थी. ऐसे में मोदी सरकार अपने अंतिम बजट में इसकी घोषणा करने वाली थी. लेकिन, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसकी घोषणा करके पहली बाजी जीत ली है.

ग़रीबों के न्यूनतम आमदनी के लिए कुछ अर्थशास्त्रियों के प्रस्ताव:

अर्थशास्त्री प्रणब बर्धन ने ग़रीबों के खाते में प्रति वर्ष 10,000 रुपए देने का प्रस्ताव सरकार के पास रखा था. इसे देश के सभी लोगों को दिया जाना था. इसमें आना वाला कुल खर्च जीडीपी का 10 फ़ीसदी बताया गया था.

अर्थशास्त्री विजय जोशी ने सालाना 3,500 रुपए देने का प्रस्ताव भेजा था. इसमें आने वाला कुल खर्च जीडीपी का 3.5 प्रतिशत बताया गया था. वहीं अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने प्रति वर्ष 13,000 रुपए देने की सलाह दी थी. इस पर जीडीपी का कुल 11 प्रतिशत खर्च होने का अनुमान था.

कांग्रेस को होगा फ़ायदा?

लोकसभा चुनाव में मुश्किल से तीन महीने बचे हैं. ऐसे में कांग्रेस का यह दांव निश्चित तौर पर वोटरों को आकर्षित कर सकता है. 2014 में लंबे चौड़े वायदे करके सत्ता में आई भाजपा अपने चुनावी घोषणा पत्र को लागू करने में नाकाम रही है. रोज़गार से लेकर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने में नाकाम मोदी सरकार के मुकाबले तीन राज्यों में सत्ता में आने के बाद कर्ज़माफ़ी और अन्य चुनावी वादों को पूरा करने वाले राहुल गांधी का चेहरा है, ऐसे में निश्चित तौर पर कांग्रेस को इस घोषणा का लाभ मिलेगा और वह चुनाव में कम से कम करीब 40 फ़ीसदी आबादी इससे कांग्रेस के प्रति आकर्षित हो सकती है

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