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भाजपा के लिए मुश्किल है राजस्थान की राह, गुस्से में हैं राजपूत समाज के वोटर

राजपूत समाज को भाजपा का परंपरागत वोटर माना जाता है। राज्य के करीब दो दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में राजपूत समुदाय का दबदबा है।

राजस्थान चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की राह मुश्किल होती नज़र आ रही है। यहां पार्टी के परंपरागत वोटर के तौर पर पहचान रखने वाले राजपूत समुदाय के भीतर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर भारी गुस्सा है, जिसका नुकसान आगामी विधानसभा चुनाव में दिख सकता है।

राजस्थान की राजनीति में राजपूत समुदाय का बड़ा महत्व है। यहां की करीब 12 फ़ीसदी आबादी इसी समुदाय से आती है। करीब दो दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में राजपूतों का दबदबा है।

जनसंघ के स्थापना के समय से ही राजपूत समाज भाजपा का वोटर रहा है। लेकिन, पिछले कुछ समय में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राजपूत नेताओं के बीच सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है।

हाल ही में विधायक और भाजपा के संस्थापक सदस्य रह चुके जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह ने भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया, जिससे पार्टी को गहरा धक्का लगा है। राजपूत समाज के लोगों की नाराज़गी के कई कारण बताए जाते हैं, जिनमें राजमहल भूमि विवाद, पद्मावत विवाद और गैंगस्टर आनंदपाल सिंह का मुठभेड़ आदि शामिल है।

मौजूदा वसुंधरा राजे सरकार में राजपूत समाज के तीन मंत्री और एक जूनियर मंत्री शामिल हैं। जनसत्ता के मुताबिक राजपूत समाज और भाजपा के बीच रिश्ते तब से बिगड़े हुए हैं, जब जयपुर राजघराने की पद्मिनी देवी ने अतिक्रमण खत्म करने के एक अभियान के तहत राजमहल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी का विरोध किया था।

राजपूतों के भीतर का गुस्सा तब और भी बढ़ गया जब रावण राजपूत समुदाय से आने वाले गैंगस्टर आनंदपाल सिंह को एक पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया।

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