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राजस्थान चुनाव: परिवारवाद पर भाजपा की खुली पोल, कई नेताओं के रिश्तेदारों को मिला टिकट

उम्मीदवारों की पहली सूची में भाजपा ने अपने कई नामी नेताओं के बेटों, पोतों और बहुओं को टिकट दी है.

राजनीति में परिवारवाद का ढोंग करने वाली भारतीय जनता पार्टी का असली चेहरा राजस्थान विधानसभा चुनाव में उजागर हो गया है. अगले सात दिसम्बर को होने वाले चुनाव के लिए पार्टी ने अपने कई नेताओं के परिवारवालों को टिकट दिया है. पार्टी के नेताओं का कहना है कि आंतरिक विरोध की स्थिति से बचने के लिए यह क़दम ज़रूरी था.

दरअसल, भाजपा ने बीते रविवार को अपनी पहली सूची जारी की. इसमें 131 उम्मीदवारों का नाम है. इस सूची में पार्टी के 85 वर्त्तमान विधायकों को टिकट दिया गया है और बाकी टिकट उन नेताओं के परिवारवालों को दिया गया है, जिन्हें इस बार टिकट नहीं मिली है. सबसे ख़ास बात यह है कि वंशवादी राजनीति का ख़िलाफ़त करने वाली भाजपा ने अपने पहली सूची में भाजपा के कुछ नामी नेताओं के बेटों, पोतों और बहुओं को जगह दी है.

कोलायत विधानसभा सीट से पार्टी ने वरिष्ठ नेता देवी सिंह बहती की बहू पूनम कंवर को टिकट दिया है और भरतपुर ज़िले के बयाना विधान सभा सीट की टिकट ऋषि बंसल की पत्नी ऋतु को मिली है. वहीं सूची में प्रतापगढ़ से पूर्व मंत्री नन्दलाल मीणा के बेटे हेमन मीणा, पूर्व विधायक गुरजंट सिंह के पोते गुरवीर सिंह बराड़, जोधपुर से पूर्व विधायक कैलाश भंसाली के भतीजे अतुल भंसाली और बामनवास से पूर्व विधायक कुंजीलाल के बेटे राजेंद्र मीणा के भी नाम हैं.

भाजपा नेताओं का कहना है कि 2008 के चुनावों में पार्टी में विद्रोह के कारण 15 सीटों से ज़्यादा का नुकसान झेलना पड़ा था. इसलिए ऐसी परिस्थिति को टालने के लिए पार्टी ने यह क़दम उठाया है. टिकट बंटवारे में इस तरह के परिवारवाद से  भाजपा की सच्चाई उजागर होती है. अब सवाल यह उठता है कि क्या चुनाव के समय भाजपा अपने तथाकथित ‘सिद्धांतों’ को ताक पर रख देती है?

ज्ञात हो कि इस वर्ष 7 दिसम्बर को राजस्थान में राजस्थान विधान सभा के चुनाव होने हैं, जिनके परिणाम 11 दिसम्बर को घोषित किए जायेंगे.

पीटीआई इनपुट्स पर आधारित.

 

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