कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अवमानना के दोषी अंबानी,453 करोड़ नहीं चुकाया तो जेल जाने का ख़तरा- रवीश कुमार

अनिल अंबानी को सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2018 तक एरिक्सन का बकाया चुका देने का आदेश दिया था. मगर नहीं चुका सके.

सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को अवमानना का दोषी पाया है. जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन और जस्टिस विनीत सरन की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि एरिक्सन कंपनी को चार हफ्ते के भीतर 453 करोड़ का बकाया चुका दें. वरना तीन महीने की जेल की सज़ा काटनी होगी.

कोर्ट ने यह भी कहा है कि दोषी चेयरमैन और अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में जुर्माने के तौर पर एक-एक करोड़ रुपये जमा कराएंगे. 4 हफ्ते में जमा नहीं करा सके तो एक महीने की जेल होगी. अनिल अंबानी की तरफ से मुकुल रोहतगी और कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे थे और एरिक्सन की तरफ से दुष्यंत दवे. अनिल अंबानी को सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर 2018 तक एरिक्सन का बकाया चुका देने का आदेश दिया था. मगर नहीं चुका सके.

आपको याद होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ही दिन पहले कोर्ट के दो अधिकारियों को बर्ख़ास्त कर दिया था. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कोर्ट मस्टर मानव शर्मा और सहायक रजिस्ट्रार तपन कुमार चक्रवर्ती को बर्ख़ास्त कर दिया. उन्होंने कोर्ट की साइट पर ग़लत आदेश पोस्ट कर दिया था.

आदेश था कि अंबानी को निजी रुप से हाज़िर होने की छूट नहीं दी जाती है. जो आदेश पोस्ट किया गया उसमें लिखा था कि निजी रूप से पोस्ट होने की छूट दी जाती है. जब कोर्ट ने जांच की तो पाया कि यह कोई सामान्य चूक नहीं थी. अनजाने में हो गई है ऐसा नहीं था.

भारतीय रिज़र्व बैंक ने केंद्र सरकार को 28,000 करोड़ देगा. इसी के साथ 2018-19 के दौरान रिज़र्व बैंक से मिलने वाली सरप्लस राशि 68,000 करोड़ हो जाती है. 2017-18 में रिज़र्व बैंक केंद्र सरकार को 40,000 करोड़ दे चुका है. इस अंतरिम हस्तांतरण से केंद्र को अपना वित्तीय घाटा कम करने में मदद मिलेगी.

उसका लक्ष्य है कि वित्तीय घाटा 3.4 प्रतिशत ही रहे. एक तरह से यह राशि केंद्र सरकार की कमाई मानी जाती है. इसी मामले को लेकर उर्जित पटेल के इस्तीफे के पहले काफी विवाद हुआ था. रिज़र्व बैंक के डिप्टी गवर्नर ने सवाल उठाए थे कि ऐसा करना उसकी स्वायत्तता से खिलवाड़ है.

केंद्र सरकार ने 12 पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए 48,239 करोड़ का पैकेज देने का एलान किया है. इससे बैंकों के पास पूंजी आएगी और वे कर्ज़ न देने के प्रतिबंध से बाहर आ सकेंगे. इलाहाबाद बैंक और कारपोरेशन बैंक को 15,982 करोड़ मिलेंगे. बैंक आफ इंडिया और बैंक आफ महाराष्ट्र को 4, 843 करोड़ रुपये मिलेंगे.

पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, आंध्र बैंक और सिंडिकेट बैंक को 14, 879 करोड़ मिलेंगे. इन चारों बैंकों पर कर्ज़ न देने का प्रतिबंध नहीं था. दिसंबर 2018 में केंद्र ने 7 बैंकों को 28,615 करोड़ दिया था.

हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि भारत को कम मगर विशालकाय बैंकों की ज़रूरत है. मतलब तो यही है कि बैंकों का विलय होगा. धीरे-धीरे कई बैंक हमारी नज़रों से ओझल हो जाएंगे. बैंकों के लोग विलय का विरोध करते हैं.

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(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के फ़ेसबुक पोस्ट से शब्दश: ली गई है.)

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