कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

जिस देश का वित्त मंत्री अपनी CBI के ख़िलाफ़ ब्लॉग लिख सकता है, उसी देश का प्रधानमंत्री प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दे सकता है: रवीश कुमार

गणतंत्र दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में रवीश कुमार ने मोदी सरकार पर तंज कसा है.

“दलित और वंचित तबके ही संविधान को लेकर गीत गाते हैं, उसे सबसे ऊपर मानते हैं मगर देश की आधी आबादी इसे स्वीकार नहीं करती है.” गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली के ‘द वैलेड सिटी कैफे’ में “जश्न-ए-संविधान” कार्यक्रम में एनडीटीवी के जाने-माने पत्रकार रवीश कुमार ने ये बातें कहीं. साथ ही मोदी सरकार पर चुटकी लेते हुए रवीश कुमार ने कहा की जिस देश का वित्त मंत्री अपनी ही CBI के ख़िलाफ़ ब्लॉग लिख सकता है, उसी देश का प्रधानमंत्री प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दे सकता है.

रोहित डे की किताब ‘पीपुल्स कॉन्स्टिट्यूशन’ का ज़िक्र करते हुए रवीश कुमार ने 1950 के दौर में, जलालाबाद के सब्ज़ी बेचने वाले मोहम्मद यासीन के केस को साझा किया. किस तरह से नए आज़ाद भारत में व्यापार करने के मौलिक अधिकार के खिलाफ़ नगरपालिका के फ़ैसले को उसने अदालत में चुनौती दी और जीत हासिल की. इस केस ने कैसे ना केवल यासीन ने अपने जैसे कमज़ोर लोगों के लिए दरवाज़ा खोलने का काम किया, बल्कि लोकतंत्र में लोगों के भरोसे को भी बढ़ाने का काम किया. इसी तरह के और एक-दो केस के बारे में बताते हुए उन्होंने हिंदुस्तान के संविधान की तारीफ़ की.

“ना गीता से, ना कुरान से, हिंदुस्तान चलता है संविधान से”. ऐसे ही कई गीतों का ज़िक्र करते हुए रवीश कहते हैं कि इस देश में आधे लोग जिनमें दलित-वंचित तबके के लोग आते हैं, संविधान पर गाने लिखते-बनाते हैं. मगर दूसरी ओर आधी आबादी बोलती है कि संविधान हमारे धर्म से ऊपर नहीं है. संविधान निर्माताओं की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि उस बदलते हुए दौर में भी उन लोगों ने प्रतिक्रियावादी संविधान नहीं बनाया.

अमित शाह के सिख, ईसाई, बौद्ध और हिंदुओं को ना डरने वाले बयान पर उन्होंने देश की जनता को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि इस देश में अगर संविधान की समझ होती तो इतने छोटे कद का कोई नेता इतनी बड़ी बात नहीं कह सकता था. देश में चल रही राजनीतिक सरगर्मियों पर अपने चिर-परिचित अंदाज़ में चुटकी लेते हुए रवीश ने कहा, “आज का दिन वाकई गर्व करने का दिन है. हमने सौ साल लड़ाई लड़ी, तब जा के संविधान पाया. गर्व करते रहना चाहिए, अगर इसका अभ्यास टूट जाए तो बहुत मुश्किल हो जाती है. पता लगा अचानक प्रणव मुखर्जी को भारत रत्न मिल जाए और आपको गर्व ना हो.”

बड़े-बड़े बैंकरों के खिलाफ़ सीबीआई जांच पर अरुण जेटली के लिखे ब्लॉग पर भी उन्होंने बात की. उन्होंने कहा, “जिस देश का वित्त मंत्री अपनी ही सीबीआई के खिलाफ़ ब्लॉग लिख सकता है तो इसका मतलब है कि लोकतंत्र ज़िंदा है.”

संविधान के उल्लंघन को सामान्य मान लेने की आदत पर रवीश ने कहा, “फ़िल्म में हम सिंघम को देखते हैं हीरो मानते हुए और खुश हो जाते हैं मगर बाद में वही ‘शिखर’ गुटका बेंचता हुआ तमाम तरह के दंगाइयों के साथ दिखता है.”

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