कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

केदारनाथ दर्शन के नाम पर टीवी सीरियल वाली एक्टिंग कर रहे हैं नरेन्द्र मोदी: रवीश कुमार

क़ायदे से प्रधानमंत्री का यह स्पेस प्राइवेट होना चाहिए. मगर उन्हें पता है कि मतदान होना है. उनके होने से उनकी गुलामी का आदी हो चुका मीडिया लगातार शिव पर कार्यक्रम बनाएगा.

सब कुछ ड्रामा जैसा लगता है. सारा ड्रामा इस यक़ीन पर आधारित है कि जनता मूर्ख है. उसे किसी बादशाह पर बनी फिल्म दिखाओ या ऐसा कुछ करो कि जनता को लगे कि वह किसी बादशाह को देख रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ गए हैं. पूरी यात्रा को एक सेट में बदल दिया गया है ताकि न्यूज़ चैनलों पर लगातार कवरेज़ हो सके. भारत की भोली जनता को बताया जा सके कि सत्ता और ऐश्वर्य से दूर कोई आम भक्त की तरह धार्मिक यात्रा कर रहा है. मगर हो रहा है ठीक उलट.

जो लोग ईश्वर को मानते हैं, वो यही बताते हैं कि उसके दरबार में सब बराबर हैं. हमने यही देखा है. बड़े बड़े नेता पहले ही लाइन तोड़ कर मंदिर में आगे चले गए मगर पूजा के लिए उसी तरह साधारण नज़र आए. ऐसा कभी नहीं हुआ कि केदारनाथ के दर्शन के लिए जाते किसी साधारण भक्त के लिए लाल कालीन बिछी है. उनके लिबास बता रहे हैं कि भक्ति भी किसी टीवी सीरीयल का अभिनय है. प्रधानमंत्री भक्ति के नाम पर अभिनय कर रहे हैं.

न्यूज़ चैनलों ने इस देश के लोकतंत्र और मर्यादा को बर्बाद कर दिया है. आम लोगों की तकलीफ के लिए कार्यकारी संपादक स्टुडियो से बाहर नहीं जाते. ओडिशा में लोग तबाही से जूझ रहे हैं वहां कोई चैनल नहीं है. मगर केदारनाथ के ड्रामे को कवर करने के लिए ज़ोर देकर बताया जा रहा है कि हमारे कार्यकारी संपादक मौके पर मौजूद हैं.

क़ायदे से प्रधानमंत्री का यह स्पेस प्राइवेट होना चाहिए. मगर उन्हें पता है कि मतदान होना है. उनके होने से उनकी गुलामी का आदी हो चुका मीडिया लगातार शिव पर कार्यक्रम बनाएगा. ब्रह्म कमल के गुण गाएगा. पुजारी के पास बोलने के लिए कुछ नहीं है. कैमरे में प्रधानमंत्री गंभीर दिख रहे हैं. पुजारी बता रहे हैं कि जैसे मायके में बेटी आकर खुश होती है वैसे चौथी बार केदार आकर खुश हैं.

कैमरे के सामने मोदी विकास कार्यों की समीक्षा का अभिनय कर रहे हैं. उनकी हर गतिविधि को ख़बर के तौर पर पेश किया जा रहा है. कानून भले ही कोई नुस्ख न निकाल पाए मगर नैतिकता का तकाज़ा कहता है कि प्रधानमंत्री ने ड्रामा का अति कर दिया है.

चुनाव आयोग में बग़ावत है. यह बेहद गंभीर ख़बर है. एक चुनाव आयुक्त ने आयोग पर आरोप लगाया है कि यह संस्था नियमों के हिसाब से काम नहीं कर रही है. न्यूज़ चैनल केदारनाथ का कवरेज दिखा रहे हैं. प्रधानमंत्री अपने साथ सारे कैमरे केदारनाथ ले गए हैं.

शिव तक पहुंचने का रास्ता लाल कालीन से होकर जा रहा है. बनारस में प्रधानमंत्री ही बोल सकते हैं कि विश्वनाथ धाम प्रोजेक्च से काशी को मुक्ति मिली है. जिस काशी में लोग मुक्ति के लिए आते थे, उस काशी को मुक्ति दिलाने की बात प्रधानमंत्री ही कर सकते हैं. ऐसा लगता है कि सारा देश एक व्यक्ति के शौक के लिए मौन धारण किए बैठा है. हर ग़लत पर सही के निशान लगा रहा है. यह अजीब दृश्य है. शिव के अनादर का दृश्य है.

शिव के भक्त तो जलती धूप में नंगे पांव सैंकड़ों किमी चले जाते हैं. यह भी शिव की भक्ति का एक तरीका है. मतदान को प्रभावित करने के लिए लाल कालीन पर चल कर भोले तक पहुंचा जाए. जनता की इस मासूमियत पर प्रधानमंत्री अपनी जीत अहसान की तरह न्यौछावर कर रहे हैं. हर समय ख़ुद को अवतार के फ्रेम में रखकर सार्वजनिक जीवन को सीरियल में बदल रहे हैं. बम बम भोले.

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार की फ़ेसबुक पोस्ट से हू-ब-हू लिया गया है.)

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