कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

CBI निदेशक आलोक वर्मा ने लिखा इस्तीफ़े का भावुक पत्र- 40 साल तक पुलिस विभाग में बेदाग करियर का यह हुआ अंजाम, पूरा पत्र पढ़ें

आलोक वर्मा ने पत्र में लिखा कि फायर सर्विस, सिविल डिफ़ेंस और होमगार्ड के डीजी का पद नहीं संभाल सकूंगा. मुझे आज के दिन से सेवानिवृत माना जाए.

10 जनवरी 2019 को सरकार ने मेरा ट्रांसफर फ़ायर सर्विस सिविल डिफ़ेंस और होमगार्ड के डीजी के पद पर कर दिया.

1.सेलेक्शन कमेटी ने मुझे सीवीसी की रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया. प्राकृतिक न्याय और नियमों को ताक पर रखकर मुझे पद से हटाया गया. सेलेक्शन कमेटी ने इस बात का भी ध्यान नहीं रखा कि सीवीसी रिपोर्ट उस व्यक्ति के आरोपों पर आधारित है जो खुद ही सीबीआई जांच के दायरे में है. सीवीसी ने शिकायतकर्ता के कथित बयान को मामले की जांच कर रहे सेवानिवृत न्यायाधीश ए.के पटनायक के पास भेजा था. न्यायमूर्ति पटनायक ने भी कहा है कि उनकी रिपोर्ट का निष्कर्ष उनका अपना नहीं है. (यानि उन्होंने शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर जांच रिपोर्ट बनाई है.

2.संस्थाएं हमारे लोकतंत्र के दृश्यमान प्रतीक हैं. और यह बात अतिशयोक्ति नहीं है कि सीबीआई आज भारत की महत्वपूर्ण संस्थाओं में शुमार है. कल जो फ़ैसला लिया गया है वह सिर्फ मुझसे जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि यह इस बात का साक्ष्य है कि आने वाले दिनों में सरकारें सीवीसी के माध्यम से देश के संस्थानों के साथ किस तरह का व्यवहार करेंगी. यह देश के लिए आत्मपरीक्षण करने का समय है.

3. एक अधिकारी के तौर पर अपने लगभग चार दशक के कार्यकाल के दौरान मैंने सत्यनिष्ठा से काम किया है. भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी के तौर पर मेरा करियर बेदाग रहा है और मैंने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, पुद्दुचेरी, मिजोरम और दिल्ली पुलिस के मुखिया की जिम्मेदारी संभाली है. मैंने दिल्ली कारागार और सीबीआई के मुखिया के पद पर भी काम किया है. अपने कार्यकाल के दौरान मुझे मेरे पुलिस विभाग के सहयोगियों का पूरा समर्थन मिला, जिसकी बदौलत हमने अपने विभाग में कई उपलब्धियां हासिल की. मैं भारतीय पुलिस सेवा और उन सभी संगठनों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिनके साथ मुझे काम करने का मौका मिला.

4. यह भी ध्यान देने वाली बात है कि 31 जुलाई 2017 को ही मैं सेवानिवृत हो गया था. उसके बाद मुझे सीबीआई निदेशक के पद पर 31 जनवरी 2019 तक के लिए बहाल किया गया. मैं अब सीबीआई का निदेशक नहीं रहा और साथ ही मेरी उम्र भी इतनी हो चुकी है कि फायर सर्विस, सिविल डिफ़ेंस और होमगार्ड के डीजी का पद नहीं संभाल सकूंगा. तदनुसार मुझे आज के दिन से सेवानिवृत माना जाए.

धन्यवाद,

आलोक कुमार वर्मा

(न्यूज़सेंट्रल24X7 ने आलोक कुमार वर्मा की इस्तीफ़े का हिंदी अनुवाद किया है. मूल पत्र अंग्रेजी भाषा में है, जिसे यहां क्लिक करके पढ़ा जा सकता है)

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