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अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के फ़ैसले को सेना के रिटायर्ड अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, कहा- असंवैधानिक और अवैध है सरकार का फ़ैसला

याचिका में कहा गया है कि सरकार का यह फ़ैसला उस सिद्धांतों पर आघात करता है, जिसके आधार पर जम्मू-कश्मीर का विलय भारतीय गणराज्य में हुआ.

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त  किए जाने के मोदी सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सेना के रिटायर्ड जवानों और अधिकारियों ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली है. इस याचिका में कहा गया है कि सरकार ने जम्मू-कश्मीर के लोगों की राय जाने बिना ही यह फ़ैसला लिया है.

इंडिया टुडे की ख़बर के मुताबिक इस याचिका को पूर्व एयर वायस मार्शल कपिल काक, रिटायर्ड मेजर जनरल अशोक मेहता, पूर्व आईएएस अधिकारी हिंडल हैदर त्याबजी, अमिताभ पांडे, गोपाल पिल्लई और राधा कुमार द्वारा डाला गया है. इस याचिका को अधिवक्ता अर्जुन कृष्णन, कौस्तुभ सिंह और राजलक्ष्मी सिंह ने तैयार किया है.

अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के राष्ट्रपति के आदेश को याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक रूप से अवैध बताया है. उनके मुताबिक इस फ़ैसले के लिए जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकार की सहमति जरूरी थी.

याचिका में कहा गया है कि सरकार का यह फ़ैसला उस सिद्धांतों पर आघात करता है, जिसके आधार पर जम्मू-कश्मीर का विलय भारतीय गणराज्य में हुआ. इस फ़ैसले में जम्मू-कश्मीर के लोगों की मर्जी का ध्यान नहीं रखा गया.

इंडिया टुडे  के मुताबिक याचिका में कहा गया है, “इस फ़ैसले की असंवैधानिकता इस बात में भी दिखती है कि इस फ़ैसले को राज्यपाल सत्यपाल मलिक की सहमति से लिया गया ऐसे समय में जब जम्मू-कश्मीर में राज्य की चुनी हुई सरकार नहीं है.

इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर प्रदेश के विभाजन को भी कोर्ट में चुनौती दी है. याचिका में कहा गया है कि प्रदेश की सरकार के सहमति के बिना उसका बंटवारा नहीं किया जा सकता है.

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