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सर्वे में हुआ खुलासा : मोदी सरकार में कमज़ोर हुआ है सूचना का अधिकार कानून

यूपीए के कार्यकाल में लगातार तीन सालों तक भारत दूसरे स्थान पर था, लेकिन अब पिछड़कर छठे स्थान पर आ गया है।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून लागू करने में मोदी सरकार नाकाम रही है। इस बात का खुलासा हुआ है एक अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में। इस रैंकिंग में पहले भारत का दूसरा स्थान था लेकिन, मोदी सरकार के आने के बाद अब देश चार पायदान खिसककर छठे स्थान पर आ गया है।

जनसत्ता के मुताबिक मानवाधिकार के क्षेत्र में काम करने वाली विदेशी गैर-सरकारी संस्था एक्सेस इन्फो यूरोप और सेन्टर फॉर लॉ एंड डेमोक्रेसी ने अपने अध्ययन में इस बात का खुलासा किया है। यह संस्था हर साल 123 देशों में आरटीआई के प्रभाव का अध्ययन करती है। इसके बाद देशों की रैंकिंग तैयार की जाती है।

इस सर्वे के मुताबिक 2011, 2012 और 2013 में लगातार तीन सालों तक भारत दूसरे स्थान पर बना रहा था। लेकिन, अब भारत स्लोवेनिया, श्रीलंका, सर्बिया, मैक्सिको और अफगानिस्तान से भी पीछे जाकर छठे स्थान पर लुढ़क गया है।

इस सूची के जरिए देशों में सूचना का अधिकार कानून की प्रगति और कमजोरियों की समीक्षा की जाती है। सूची को तैयार करने के लिए 150 प्वाइंट स्केल का इस्तेमाल किया जाता है।

जनसत्ता के अनुसार इस संस्था ने अलग-अलग देशों में आरटीआई तक पहुंचने का अधिकार, दायरा अनुरोध प्रक्रिया, इनकार, अपील, सुरक्षा और अपवाद इत्यादि सर्वेक्षण के आधार पर इस सूची को तैयार किया है।

बताया गया है कि साल 2017 में भारत में आरटीआई के तहत कुल 66.6 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। इसमें से तकरीबन 7.2 फीसदी यानी 4.8 लाख आवेदनों को खारिज़ कर दिया गया। जबकि 18.5 लाख आवेदनों को अपील के लिए सीआईसी के पास भेजा गया। सीआईसी ने आवेदकों की अपील पर 1.9 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।

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