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आरटीआई खुलासा: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की जगह निजी कंपनियों को मिल रहा है लाभ

आरटीआई की सूचना के अनुसार दो सालों में निजी कंपनियों ने 15,795 करोड़ रुपए का लाभ प्राप्त किया है.

प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना को फसलों की बर्बादी झेल रहे किसानों के राहत लिए शुरू किया गया था. लेकिन इसके ठीक विपरीत इस योजना का लाभ निजी बीमा कंपनियों को हो रहा है.

कार्यकर्ता दिनेश चड्ढा ने आईटीआई के तहत फसल बीमा योजना की जानकारी मांगी थी. द ट्रिब्यून इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार निजी कंपनियों ने योजना के दो वर्षो के भीतर ही अब तक 15,795 करोड़ रुपए का लाभ प्राप्त किया है. दरअसल, इस फसल बीमा योजना के तहत 18 कंपनियों को अनुबंध दिया गया था. जिनमें केवल 5 सार्वजनिक जबकि 13 निजी कंपनियों को योजना में शामिल किया गया था. दो सालों के अंदर निजी कंपनियों ने लाभ का एक मौट हिस्सा करीब 8,147 रुपए कमाए हैं.

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साल 2016-17 के बीच निजी कंपनियों ने 3,283 करोड़ रुपए कमाए थे वहीं साल 2017-18 के बीच कंपनियों को 4,863 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ है. बीमा योजना का 80 प्रतिशत लाभ 5 निजी कंपनियों को हुआ है. जिसमें एडीएफसी 1,816 करोड़ रुपए, रिलायंस 1,361 करोड़ रुपए, यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी 1,195 करोड़ रुपए, आईसीआईसीआई 1,193 करोड़ रुपए और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस 1,059 करोड़ रुपए का लाभ कमाया है. इनके अलावा अन्य प्रमुख लाभ पाने वाली निजी कंपनियों में बजाज एलियांज जनरल इंश्योंरेस, भारतीय-एक्सीसीए इंश्योरेंस कंपनी और श्रीराम इंश्योरेंस कंपनी समेत दूसरी निजी कंपनियां भी शामिल हैं.

आईटीआई के तहत सूचना प्राप्त करने वाले कार्यकर्ता दिनेश चड्ढा का कहना है कि केंद्र सरकार को इस योजना के लिए अपनी स्थिति का स्पष्टिकरण देना चाहिए. उन्होंने सवाल किया कि क्या यह योजना किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए है या फिर बड़े कॉर्पोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए. उन्होंने कहा कि किसानों के नाम पर बड़े कॉर्पोरेट को फ़ायदा पहुंचाया जा रहा है.

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ज्ञात हो कि इससे पहले पत्रकार पी साईनाथ ने भी प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना को भारत का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया था. ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए इस योजना की शुरूआत साल 2016 में की थी.

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