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सबरीमला विवाद: दलित कार्यकर्ता ने बयां किया दर्द- मेरी बेटी को स्कूल में प्रवेश से वंचित कर रहे दक्षिणपंथी संगठन के लोग

दलित कार्यकर्ता कल्याणी सबरीमला में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश के समर्थन में मुखर रही हैं.

सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर चल रहा विवाद थम नहीं रहा है. हाल में एक 43 वर्षीय स्कूल शिक्षिका और दलित कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनकी 11 वर्षीय बेटी को एक निजी स्कूल ने दाखिला देने से इनकार कर दिया है. उन्होंने बताया कि यह निजी स्कूल दक्षिणपंथी संगठनों के दबाव में ऐसा कर रही है.

पालक्काड ज़िले के अगाली में गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाने वाली बिंदू थैंकम कल्याणी, जो कि सबरीमला में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश का लगातार समर्थन कर रही हैं, उन्हें आरएसएस समर्थित दक्षिणपंथी संगठनों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कल्याणी ने बताया, “मैंने कुछ दिन पहले अनाइकट्टी के विद्या वनम स्कूल में प्रिंसिपल और शिक्षकों से बात की थी और वे मेरी बेटी के दाखिले के पक्ष में थे. लेकिन, जब मैं कल अपनी बेटी के साथ वहां गई, तो स्कूल के गेट के बाहर लगभग 60 लोग इकट्ठा हुए थे. शुरुआत में मुझे पता नहीं चला कि वे लोग वहां इकट्ठा क्यों हुए, लेकिन बाद में मुझे एहसास हुआ कि वो सभी मेरे और मेरी बेटी के प्रवेश के विरोध में इकट्ठे हुए थे. मुझे अनाइकट्टी में किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी.”

उन्होंने आगे कहा कि उन्हें लगता है कि स्कूल के अधिकारी उनकी बेटी को प्रवेश देने के पक्ष में हैं, लेकिन उन्हें डर है कि विरोध प्रदर्शन स्कूल में अन्य बच्चों की पढ़ाई को भी प्रभावित कर सकता है. वहां लगभग 300 बच्चे पढ़ते हैं.

इस पूरी घटना से चिंतित कल्याणी ने पूछा कि दक्षिणपंथी समूह उन स्कूलों का विरोध कैसे कर सकते हैं, जहां छोटे बच्चे पढ़ते हैं?

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