कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ग्राउंड रिपोर्ट: ‘ठेकेदार ने माँगने पर भी नहीं दिया था सुरक्षा उपकरण’- सफ़ाईकर्मी किशन की मौत के बाद परिवार के मौजूदा हालात

मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण किशन की पत्नी मुआवजे की राशि बैंक से नहीं निकाल पा रही हैं.

20 जनवरी 2019 के बाद अपनी बूढ़ी मां और तीन बच्चों की भविष्य की चिंता में डूबी इंदु देवी कहती हैं कि, “वह नाले की सफ़ाई के लिए गए थे. हर रोज़ दोपहर में आ जाते थे. खाना खाकर आराम करते थे. उस दिन नहीं आए. नाले में उतरने से पहले ठेकेदार से जीवन रक्षा और काम से जुड़े उपकरण भी मांगा था. ठेकेदार ने कुछ नहीं दिया, कहा — सब मिल जाएगा..आज ऐसे ही काम कर लो.”

किशन और इंदु के बच्चे (फोटो-काजल सिंह)

20 जनवरी 2019 को उत्तरी दिल्ली के वज़ीराबाद इलाके में भूमिगत नाले की सफाई के दौरान किशन लाल (37) की दम घूटने से मौत हो गयी थी. बिना किसी सुरक्षा के नाले की सफ़ाई दिल्ली जल बोर्ड निगम द्वारा कराई जा रही थी. किशन अपनी पत्नी इंदु देवी, बूढ़ी सास और तीन बच्चों — दिनेश (15), नंदनी (13) और कमलेश (10) — का भरण-पोषण करने वाला इकलौता व्यक्ति था.

मृतक किशन लाल

इंदु देवी आगे कहती हैं, “उस दिन किशन के साथ 4 और भी लोग थे. दो लोग पहले उतरे थे नाले में वे वापस आ गये. उसके बाद वह (किशन) गए, लेकिन वापस नहीं आए. उनके साथ वाले लोगों ने उन्हें आवाज़ दिया. उन्होंने कुछ नहीं बोला. जब वह वापस नहीं आए तो मौके पर मौजूद ठेकेदार वहां से फरार हो गया. हमें फोन से इसकी सूचना मिली. फिर, हमारे यहां से एक लड़का दिलीप वहां पहुंचा और नाले में घूसकर उन्हें ढूंढ़ने की कोशिश की. लेकिन, वह नहीं मिले. इसके बाद दिलीप ने नंबर 100 पर फोन किया.”

दिलीप भी एक सफ़ाईकर्मी है. किशन और दिलीप का परिवार वज़ीराबाद गोपालगंज सीएनजी पंप (रिंग रोड) के पास स्थित झुग्गियों में रहता है.

फोन पर दिलीप ने बताया, “अब मैं सीवर की सफाई का काम नहीं करता हूं. जब से किशन की मौत हुई है. वहां कोई सफ़ाई नहीं होती. अब हम खुले नालों की सफाई करते  हैं. पानी के ज़्यादा अंदर नहीं जाते हैं. सेफ्टी के तौर पर जैकेट और सुरक्षा बेल्ट मिलता है. ताकि डूबने से बचा जा सके.”

इसी बीच झुग्गी में बैठ कर झालर बना रही किशन की सास मीरा देवी (60) कहती हैं कि, “ठेकेदार ही टॉर्च देकर किशन को नाले में भेजा था. जब वह नाले से बाहर नहीं आया तो ठेकेदार वहां से भाग गया. उसे दिहाड़ी 300 से 400 रुपये मिलता था. उसके सुरक्षा के लिए ठेकेदार ने कुछ नहीं दिया था. नंगे हाथ नाले के कचरे को बाहर निकाल कर सफ़ाई कर रहा था. ज़मीन के अंदर पाइप में घूसा हुआ था. ”

किशन की सास मीरा देवी (फोटो- काजल सिंह)

घर ख़र्च चलाना भारी

न्यूज़सेंट्रल24×7 से बात करते हुए मीरा देवी ने बताया कि, “घर की स्थिती बहुत ख़राब है. खर्चा चलाना मुश्किल है. लड़का जबसे ख़त्म हुआ है तब से मेरी बड़ी बेटी ही हमारा राशन-पानी दे रही है. हमारे लिए वह अनाज़ यहां लाके पहुंचा जाती है. अब कमाने वाला कोई है नहीं तो कौन करेगा ये सब.”

वहीं, झालर को लेकर मीरा देवी ने कहा कि, “यहीं पास में कोई फैक्ट्री है. पड़ोस के लोग यह बनाने के लिए लाकर दे जाते हैं. एक झालर का 15 रुपए मिलता है. बहुत मेहनत लगता है बनाने में, दिनभर में सब मिलकर 3 से 4 झालर बना पाते हैं.”

दरअसल, इंदु देवी और उनके मां के पास दो झुग्गियां थी. किशन के गुजरने के बाद एक झुग्गी को 2000 रुपये के किराए पर दे दी है. अब इनके पास सिर्फ एक झुग्गी है, जिसमें 5 लोग रहते है. झुग्गी में एक तरफ घरेलू सामान, दुसरी तरफ गैंस सिलेंडर व किचन का सामान, एक कोने पर भगवान के कुछ पोस्टर और पूजा की कुछ सामग्री रखी हैं. साथ ही पानी का एक डिब्बा भी रखा है. सोने के लिए नीचे बिछावन लगाया गया है और गर्मीं से राहत पाने के लिए एक पंखा भी लगा है.

झुग्गी की स्थिती (फोटो-काजल सिंह)

यदि इस झुग्गी की उंचाई की बात करें तो सीधा खड़ा होने पर छत से सर टकराने की नौबत आ रही थी. झुग्गी में लगे पंखे के नीचे से झुककर गुजरने के अलावा कोई और चारा नहीं है.

मुआवज़ा राशि और नौकरी के लिए काट रहे दफ़्तरों के चक्कर

किशन की मौत पर जमकर राजनीति की गयी थी. एक तरफ भाजपा किशन की मौत के लिए दिल्ली सरकार को ज़िम्मेदार बता रही थी, वहीं, दिल्ली की कांग्रेस अध्यक्ष शिला दीक्षित किशन लाल के परिवार से वहां मिलने पहुंची थी. शिला दीक्षित ने पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद भी की थी. इसी घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे. केजरीवाल ने 10 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का ऐलान किया.

इंदु कहती हैं कि मुआवजे की राशि उनके खाते में आ गयी है. हालांकि, वह इन पैसों को निकाल नहीं पा रही हैं. “ किशन और मेरा ज्वाइंट एकाउंट है. साथ ही किशन का मृत्यु प्रमाण पत्र देने के बाद ही इस राशि को निकाल पाऊँगी.”

-एक बार वह सभी कागजात जमा कर चुकी है. लेकिन, फिर से जमा करने के लिए कहा गया है. मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वह कोशिश कर रही है.

वहीं, केजरीवाल सरकार के नौकरी देने के वादे पर इंदु का कहना है कि, “नौकरी के लिए घटना के तीन दिन के भीतर उनके ऑफिस बुलाया गया था. लेकिन, मैं नहीं जा पायी. क्योंकि, इनका दाह-संस्कार करना था और इनके शव को लेकर हम गांव (छतीसगढ़) गए थे. गांव से आने के बाद फरवरी में मैं उनके ऑफिस गयी थी.”

इंदु देवी, दिनेश और झुग्गी का बाहरी दृश्य (फोटो-काजल सिंह)

इंदु देवी आगे कहती हैं कि, “केजरीवाल ऑफिस के कर्मचारी ने कहा कि अभी चुनाव का वक़्त है. चुनाव के बाद आप आ जाना. फिलहाल के लिए अपनी समस्या को एक पत्र पर लिख दें. हम यह पत्र केजरीवाल को दे देंगे. चुनाव के बाद मैं उनके ऑफिस नहीं जा पाई हूं. क्योंकिं, अकेले हूं तो कुछ समझ नहीं आता है. यहां हमारे बच्चों को मुफ़्त में पढ़ाने के लिए कुछ भैया लोग आते हैं. उनसे मदद मांगी है. अभी उनका पेपर चल रहा है. जब उनके पास वक़्त होगा तब उनके साथ जाउंगी.”

वहीं, इस मामले में आरोपी ठेकेदार पर की गयी शिकायत पर मीरा देवी और इंदु कहती हैं कि, “यह मामला अब लेबर कोर्ट में चला गया है. आरोपी ठेकेदार (अनिल कुमार) बेल पर बाहर है. कई बार लेबर कोर्ट के चक्कर लगा चुके हैं. कार्रवाई चल रही है. आगे क्या होगा कौन जानता है.”

एफआईआर की कॉपी
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