कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अख़बारों ने ही एक कार्टूनिस्ट के अभिव्यक्ति पर लगाई पाबंदी, मोदी की नीतियों की करते हैं आलोचना

कार्टूनिस्ट ने दावा किया है कि एक दैनिक समाचार पत्र ने 2019 लोकसभा चुनाव तक राजनीतिक कार्टून नहीं छापने का फैसला लिया है.

दक्षिण भारत के जाने-माने राजनीतिक कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य के कार्टून को अख़बारों ने जगह देने से मना कर दिया है. अख़बारों के इस रवैए पर कार्टूनिस्ट ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. आचार्य ने ट्वीट करते हुए कहा” यह हास्यास्पद है या दुखद, मेरे कस्टमर्स में से एक (दैनिक समाचार पत्र) 2019 लोकसभा चुनाव तक राजनीतिक कार्टून नहीं छापने का फैसला लिया है.”

बता दें कि आचार्य के कार्टून नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ रही है. वो पहले भी मोदी सरकार की आलोचना कर चुके हैं जिसकी वजह से उनके कार्टून को नहीं छापा गया. अगस्त 2018 में भी इंडिया टुडे ग्रुप के डेली मेल ने कार्टून को एक फोटो के पक्ष में हटा दिया था. कार्टून के बजाय फोटो इस्तेमाल करने का फैसला लिया.

इससे पहले सतीश आचार्य ने अपने ब्लॉग “Why Mail Today Will No Longer Be Carrying My Cartoons,” बताया था कि “अब कई दिनों से कार्टून कॉलम की रक्षा और उसकी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जूझ रहा हूं. शायद संपादक के लिए एक कार्टून सिर्फ तीन कॉलम का रिक्त स्थान है, लेकिन एक कार्टूनिस्ट के लिए यह एक पूरी दुनिया है. एक ऐसी दुनिया जहां कार्टूनिस्ट अपनी राय व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र है. जिससे वह अपनी रचनात्मक सीमाओं से दुनिया को चुनौती देते है.”

आचार्य ने यह भी दावा किया था कि उनके कई अन्य कार्टून मेल टूडे ने नही जगह दिए जो गाय आधारित हिंसा, भीड़ लिंचिंग और मोदी पर अहम थे

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