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राफेल विमान के मामले में मोदी सरकार हमें सौदे की पूरी जानकारी दे- सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने कहा कि वह नोटिस जारी नहीं कर रही है लेकिन अदालत को मोदी सरकार 29 अक्टूबर तक सौदे की पूरी जानकारी दे।

बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने राफेल सौदे की सुनवाई करते हुए कहा कि मोदी सरकार बताए कि राफेल खरीद का सौदे कैसे हुआ था। अदालत ने कहा कि वह नोटिस जारी नहीं कर रही है लेकिन अदालत को मोदी सरकार 29 अक्टूबर तक सौदे की पूरी जानकारी दे। इस मामले में अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होगी।

पत्रिका की एक रिपोर्ट के अनुसार राफेल सौदे के मामले में भ्रष्टाचार होने को लेकर वकील एम.एल शर्मा, तहसीन पूनावाला और विनीत ढांडा ने याचिकाएं दाख़िल की थीं। लेकिन इस मामले में तीसरे याचिकाकर्ता तहसीन पूनावाला ने सुनवाई से पहले अपनी याचिका वापस ले ली।

गौरतलब है कि एजी के के वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले में अदालत को दख़ल नहीं देना चाहिए। केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। चूँकि सर्वोच्च न्यायालय के इस याचिका पर नोटिस जारी करने पर वह प्रधानमंत्री को जाएगा, इसलिए इस याचिका पर सुनवाई की ज़रुरत नहीं है।

वहीं वकील एम.एल शर्मा का कहना है कि राफेल सौदे में कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है और सौदे में भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा 2012 के समझौते के अनुसार फ्रेंच संसद के सामने पेश की गई राफेल की कीमत 71 मिलियन यूरो है। दासू की वार्षिक रिपोर्ट में भी विमान की असली कीमत का ज़िक्र है, लेकिन फिर भी मोदी सरकार लड़ाकू विमान की कीमत राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर छुपाने में लगी हुई है।

वकील विनीत ढांडा ने राफेल मामले में मांग की है कि भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते को सार्वजनिक किया जाए और राफेल की असली कीमत भी बताई जाए।

फ़िलहाल इस पूरे मामले में ऐसा मालूम पड़ रहा है कि मोदी सरकार इस सौदे और राफेल विमान के कीमत के बारे में जानकारी न देने में अपनी पूरी ताक़त झोंकने पर आमादा है।    

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