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पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को अपील करने से रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को लगाई फटकार, 4 अक्टूबर तक जवाब देने को कहा

संजीव भट्ट को गुजरात पुलिस ने पिछले 5 सितम्बर को गिरफ्तार किया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को अदालत का रूख करने से रोकने के लिए गुजरात सरकार को फटकार लगाई है। संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उनके पति को अदालत में अपील करने संबंधी कागजात पर दस्तख्त करने से रोका जा रहा है।

इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रंजन गोगोई और नवीन सिन्हा की बेंच ने गुजरात सरकार को कहा कि पूर्व आईपीएस अधिकारी की पत्नी का आरोप गंभीर है, इस मामले पर जल्द से जल्द सरकार को जवाब देना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सरकार किसी भी नागरिक को अदालत का रूख करने से नहीं रोक सकती। सरकार ने इस मामले पर जवाब देने के लिए गुजरात सरकार को 4 अक्टूबर तक का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा- इस मामले में सबसे पहले गुजरात सरकार श्वेता भट्ट के आरोपों का जवाब दे। हमारे अनुसार यह बेहद गंभीर आरोप है क्योंकि सरकार किसी भी नागरिक को अदालत आने से नहीं रोक सकती।

श्वेता संजीव भट्ट की तरफ से दलील पेश करते हुए दिव्येश प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने संजीव भट्ट के रिमांड को भी चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि वे लोग हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ वकालतनामा दायर करना चाहते हैं, लेकिन सरकार वकालतनामे पर संजीव भट्ट को दस्तख्त नहीं करने दे रही।

गौरतलब है कि संजीव भट्ट को 22 साल पुराने एक मामले में पिछले 5 सितम्बर को गिरफ्तार किया था। संजीव को 1996 में नशीले पदार्थ बेचने के एक मामले में राजस्थान के वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को कथित रूप से फंसाने के कारण गिरफ्तार किया गया है। उस समय संजीव बनासगांठा के एसपी थे।

बता दें कि संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट ने 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मणिनगर सीट से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

पीटीआई इनपुट्स पर आधारित

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