कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

निजी कंप्यूटरों की जासूसी पर कोर्ट ने मोदी सरकार को जारी किया नोटिस, 6 हफ़्ते में देना होगा जवाब

सरकार ने दस एजेंसियों को निजी कंप्यूटरों की डेटा जांच करने का अधिकार दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार द्वारा जांच एजेंसियों को कंप्यूटरों की निगरानी की छूट देने वाले फ़ैसले के ख़िलाफ़ नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने केंद्र से 6 हफ्ते के भीतर नोटिस का जवाब मांगा है.

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस अशोक भूषण और संजय किशन कौल की बेंच ने 20 दिसंबर की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाने वाली याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं किया है. याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा की अगुवाई में अदालत की अधिसूचना की वैधता पर फैसला होने तक अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी.

द टेलीग्राफ़ के मुताबिक अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा के नेतृत्व में याचिकाकर्ताओं ने देश में “अघोषित आपातकाल” लगाने की कोशिश का आरोप लगाया था. वहीं शर्मा ने यह भी आशंका जताई कि एजेंसियों द्वारा एकत्र की गई जानकारी के आधार पर निर्दोष नागरिकों को फंसाया जा सकता है. इसलिए, अधिसूचना “न्याय के हित में बने रहने के लिए उत्तरदायी है.

कोर्ट ने  सरकार को 6 हफ्ते का समय देते हुए कहा कि केंद्र सरकार को नोटिस औपचारिक रूप से पेश किए जाने के बाद याचिका पर विचार किया जाएगा.

गृह मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, 10 एजेंसियों के पास किसी भी निजी कंप्यूटर के डेटा को चेक करने का अधिकार है. इन एजेंसियों में इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल टैक्स बोर्ड, राजस्व खुफिया निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, कैबिनेट सचिवालय (आर एंड एडब्ल्यू), डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस (जम्मू-कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और आसाम के क्षेत्रों के लिए) और पुलिस आयुक्त, दिल्ली का नाम शामिल है.

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+