कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बेरोज़गारी की मार: नौकरी की तलाश में न्यूजीलैंड जा रहे भारतीय नागरिकों की नाव समुद्र में लापता

दिल्ली में रह रहे तमिल समुदाय के प्रवासी नौकरी की तलाश में अवैध तरीके से न्यूजीलैंड जा रहे थे.

बेरोज़गारी से जूझ रहे 100-200 प्रवासी भारतीय नागरिकों को रोज़गार की तलाश में न्यूजीलैंड ले जाने वाली नाव समुद्र में लापता हो गई है. यह नाव बीते 12 जनवरी को केरल के मुनामबाम हार्बर से निकली थी. इस नाव में दक्षिण भारतीय पुलिस की कस्टडी में मौजूद प्रभु नामक व्यक्ति की पत्नी और 8 साल की बेटी भी मौजूद है.

प्रभु का परिवार दिल्ली में रहने वाले 50 लोगों का शरणार्थी समुदाय का हिस्सा है. यह लोग अवैध तरीके से नौकरी की तलाश में न्यूजीलैंड के लिए निकले थे. हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार लापता नाव में गर्भवती महिलाओं समेत कई बच्चे भी शामिल थे. प्रभु की मां सुगना ने बताया कि सभी लोग नौकरी और खाने की तलाश में वहां गए थे. उनसे वादा किया गया था कि उन्हें न्यूजीलैंड में नौकरी दिलाई जाएगी.

उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा पहली बार हो रहा है जब भारत से नौकरी की तलाश में इतने ज्यादा लोग न्यूजीलैंड गए हैं. सुगना ने कहा कि वह नहीं जानती कि प्रभु अपनी पत्नी आनंदी और बेटी त्रिशा के साथ नाव पर क्यों नहीं चढ़ा. उन्होंने कहा कि प्रभु तस्करी करने वाले लोगों में शामिल नहीं था.

प्रभु सहित कुछ यात्री नाव पर नहीं चढ़े थे. दिल्ली वापस आने के 10 मिनट बाद केरल पुलिस ने नाव में सवार न होने वाले यात्रियों को हिरासत में ले लिया है. उन्हें पूछताछ के लिए वापस केरल ले जाया गया. पुलिस ने 70 बैग समेत 20 व्यक्ति की पहचान संबंधी दस्तावेज बरामद किए हैं.

ग़ौरतलब है कि न्यूजीलैंड जाने वाले प्रवासियों को 7 हज़ार मील से ज्यादा का सफर तय करना पड़ता है. केरल की जांच टीम के अफसरों ने नाव में सवार लोगों की संख्या 100 से 200 तक बताई है. तमिल समुदाय के कई लोग दिल्ली के मंदगीर में रहते हैं. लेकिन, इस समुदाय के लोगों को बेरोज़गारी का सामना करना पड़ रहा है. एक श्रीलंकाई शरणार्थी जिनका बेटा, बहू और उनके 2 बच्चे नाव पर सवार थे, उन्होंने कहा कि अगर हमें मौका मिला तो हम भी जाएंगे. यह एक सड़ा हुआ स्थान है. बेरोज़गारी से जूझ रहे लोग मोदी सरकार के प्रति बेहद गुस्से में हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने पर लाखों की संख्या में नई नौकरियां देने का वादा किया था. जो पूरा नहीं हुआ है.

सेंटर ऑफ मॉनिटेरियन इंडिया इकोनॉमी की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 11 मिलियन लोगों ने अपनी नौकरियां गवाई हैं. अन्य देशों में नौकरी के लिए गए लोगों की एक बड़ी संख्या अवैध तरीके से वहां गई है. तमिल एन्क्लेव के मजदूर कम भुगतान पर काम करने के लिए मजबूर हैं. बुमी नामक एक महिला का कहना है कि अगर मैं सक्षम हुई तो मैं मोदी के घर जाऊंगी और उनके पैरों पर गिरकर दूसरे देश जाने की इज़ाज़त देने की भीख मागूंगी.

ग़ौरतलब है कि देश में बेरोज़गारी के ऐसे हालात होने के बावजूद मोदी सरकार सीएमआईई के आंकड़ों को गलत ठहराने से पीछे नहीं हटती है. बीते गुरुवार को कई कैबिनेट मंत्रियों ने ऑनलाइन जॉब पोर्टल, नौकरी  के वैकल्पिक आंकड़ों की को दिखाते हुए पिछले साल के मुकाबले रोज़गार में बढ़ोतरी दिखाई है.

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