कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राफ़ेल पर बात करने से क्या कम हो जाएगा मोदी का 56 इंच का सीना? : शत्रुघ्न सिन्हा

विपक्षी दलों की बैठक में शत्रुघ्न सिन्हा शामिल हुए. इस दौरान वहां चौकीदार चोर है के नारे भी लगे.

मोदी सरकार की नीतियों से असंतुष्ट भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा बुधवार को दिल्ली में विपक्षी नेताओं की रैली में शामिल हुए. राफ़ेल मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि पीएम के इस मुद्दे पर बात करने से क्या उनका 56 इंच का सीना कम हो जाएगा?

एक ओर कल जहां राफे़ल विमान सौदे पर कैग की रिपोर्ट संसद में पेश की गई, वहीं दूसरी ओर सिन्हा ने मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देश के प्रति जवाबदेह बताते हुए कहा कि भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते पर उन्हें सच बोलना चाहिए.

फिल्म स्टार से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा की बातें सुनकर भीड़ “चौकीदार चोर है” के नारे लगाती रही. ग़ौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी और उसके प्रमुख राहुल गांधी, राफ़ेल मुद्दे पर मोदी को निशाना बनाने के लिए इस नारे का इस्तेमाल करते रहे हैं. सिन्हा की विपक्षी दलों की रैली में भागीदारी और मोदी पर की गई टिप्पणियों से उनके और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच अधिक कड़वाहट बढ़ गई है.

दिल्ली के जंतर मंतर पर इस रैली का आयोजन आम आदमी पार्टी (आप) की ओर से किया गया था. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने मोदी और भाजपा को देश के संवैधानिक मूल्यों और लोकतंत्र के लिए ख़तरा बताते हुए कहा कि आगामी लोकसभा चुनावों में इन्हें सत्ता से बेदखल करना है.

बिहार के पटना साहिब से भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा  रैली के बीच में शामिल हुए और केंद्र में सत्तारूढ़ अपनी ही पार्टी की सरकार पर निशाना साधते नज़र आए. सिन्हा ने कहा- “मैं इस रैली को अपना पूरा समर्थन देता हूं. ये किसी दोस्त के बारे में नहीं है, यह देश को बचाने के बारे में है. मेरे लिए पार्टी मुझसे ऊपर है, मगर पार्टी से भी ऊपर मेरा देश है.”

सिन्हा ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी के वादों और प्रदर्शनों के बीच में एक बहुत बड़ी खाई है. अगर किसान परेशान हैं, देश के संस्थान संकट से जूझ रहे हैं और लोग राजनीतिक बदले का सामना कर रहे हैं तो क्या हमें चुप रहना चाहिए? मैं स्वार्थी वजहों से राजनीति में शामिल नहीं हुआ हूं.”

प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए सिन्हा ने कहा कि 2014 में मोदी लहर को न केवल ‘आशा की किरण’ बल्कि ‘रोशनी की किरण’ के रूप में पेश किया गया था. “वे (मोदी) कहते हैं कि 2014 में मोदी लहर थी. फिर, अरुण जेटली अमृतसर से चुनाव क्यों हार गए?”

सिन्हा ने कहा कि इस हार के बदले में जेटली को कैबिनेट में इनाम के तौर पर चार मंत्रालय दे दिए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि चाटुकारों को लाइन में खड़ा करके विजय गीत गवाए जाते हैं. केंद्र की विद्युतीकरण योजना, किसानों से किए गए वादे और युवाओं को नौकरियों के आश्वासन जैसे जुमलो की भी सिन्हा ने आलोचना की.

पीटीआई इनपुट्स पर आधारित

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