कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

भाजपा सांसद के क़रीबी पर यौन उत्पीड़न का आरोप, शिकायत करने पर छीन ली गई नौकरी

कार्यालय में गठित जांच समिति ने आरोपों की पुष्टि की। लेकिन, इन सिफारिशों पर कोई अमल नहीं किया गया।

उद्योग जगत से राजनीति में आने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद राजीव चंद्रशेखर के बेंगलुरु स्थित कार्यालय में कार्यरत एक महिला ने उनके एक क़रीबी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
द वायर की एक ख़बर के मुताबिक़ यह आरोप लगाने के बाद पीड़िता को नौकरी से निकल दिया गया और उन्हें इस मामले में एक एक्स-पार्टे आदेश के तहत किसी से भी बात करने की अनुमति नहीं है।
पीड़िता ने चन्द्रशेखर के कार्यालय में अक्टूबर 9, 2017 से एक साल के कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम करना शुरू किया था। इस कार्यकाल के ख़त्म होने के बाद स्वयं ही इसका नवीकरण होना था। वे चन्द्रशेखर के क़रीबी दोस्त और मंत्री के मीडिया कंपनियों में से एक, एशियानेट के सीओओ, अभिनव खरे को रिपोर्ट करती थीं।
पीड़िता ने काम शुरू करने के एक महीने बाद खरे पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए सीधे चंद्रशेखर को शिकायत की थी।
जानकारी के मुताबिक़, पहले कंपनी ने मामले को खारिज करने की कोशिश की थी। लेकिन, बाद में इसकी जांच के लिए एक अनौपचारिक जांच समिति का गठन किया गया। इस समिति ने कार्यस्थल में यौन उत्पीड़न की रोकथाम कानून के तहत निर्धारित समय से दोगुना समय लेकर अपनी रिपोर्ट जून 2018 में जमा की।
समिति ने उनके आरोपों का समर्थन किया और खरे के ख़िलाफ़ लिए जाने वाले दंडनीय उपायों की सिफारिश की।
इसका अभी तक कोई रिकॉर्ड नहीं है कि कंपनी ने इस रिपोर्ट को स्वीकार किया या ख़ारिज़ किया। सितम्बर के अंत में पीड़िता ने समिति के सिफारिशों के बारे में पूछना शुरू किया। उन्होंने खरे को रिपोर्ट करने की स्थिति में काम फिर से शुरू करने से भी इनकार कर दिया।
पिछले कुछ हफ़्तों में भारत में ज़ोर पकड़े #Metoo कैंपेन में जब पीड़िता ने खरे और चंद्रशेखर के बारे में ट्विटर पर बात करने की कोशिश की, तो अक्टूबर 8 को खरे ने अदालत से जांच समिति के सिफारिशों पर अमल न करने के लिए एक एक्स पार्टे आदेश ले लिया।
अदालत के इस आदेश ने खरे के ख़िलाफ़ लगाये पीड़िता के आरोपों पर पीड़िता द्वारा बात करने, लिखने या किसी भी तरह से संप्रेषित करने पर भी रोक लगा दी।
चंद्रशेखर के बेंगलुरु स्थित कार्यालय के एचआर विभाग के प्रमुख सूर्या राजू ने द वायर को बताया कि पीड़ित महिला का कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट अक्टूबर 8 को ख़त्म हो गया है और वह उस कंपनी की कर्मचारी नहीं रहीं। जब उनसे पीड़िता के यौन उत्पीड़न के शिकायत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दावा किया, “जाँच ख़त्म हो चुकी है, हमने सिफारिशों पर अमल किया है….कंपनी यौन उत्पीड़न की तरफ ज़ीरो टोलरेंस की नीति पर काम करती है।”
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