कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

आदिवासी समाज के संघर्षों को मिली पहचान, सोनी सोरी को आयरलैंड अधिकार समूह ने किया सम्मानित

सोनी सोरी यह सम्मान पाने वाली एशिया की पहली महिला हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासी समाज के लोगों के हक की आवाज़ उठाने वाली बहादुर महिला सोनी सोरी को अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है। आयरलैंड अधिकार समूह ने उनके उल्लेखनीय कार्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें फ्रंटलाइन डिफेंडर अवार्ड दिया है। हाल ही में दिल्ली के प्रेस क्लब में उन्हें यह सम्मान दिया गया। सोनी सोरी यह सम्मान पाने वाली एशिया की पहली महिला हैं।

इस मौके पर सोनी सोरी ने बस्तर और अन्य आदिवासी बहुल इलाके में रह रहे लोगों के संघर्षों को साझा किया। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन अपने हक की आवाज़ उठाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करती रही है।

गौरतलब है कि सोनी सोरी के साथ पुलिस ने एक समय में क्रूरता की हदें पार कर दी थीं। अपने साथ हुए पुलिसिया दमन का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा “पुलिस वाले आज भी मेरा दुपट्टा खींच लेते हैं और थाने से अपमानित करके भगा देते हैं।” उन्होंने कहा कि इसे लेकर उन्हें किसी से शिकायत नहीं है क्योंकि यह रास्ता उन्होंने ख़ुद ही चुना है। उन्होंने बताया कि उनकी तरह हज़ारों महिलाएं रोज़ बस्तर में इस तरह की क्रूरता का शिकार हो रही हैं।

सोनी सोरी के संघर्ष की दास्तां भारतीय शासन की कार्यप्रणाली का वीभत्स चेहरा प्रस्तुत करता है। कहा जाता है कि आदिवासियों के पक्ष में बोलने के कारण उन्हें माओवादी कहा गया और तरह तरह से प्रताड़ित किया गया। समाचार वेबसाइट सीजी बास्केट के मुताबिक पुलिस ने सोनी सोरी के योनि में पत्थर तक डाल दिये थे और उनके मुंह में कांच भर दिए गये थे। सोनी सोरी ने बताया कि पुलिस उनके साथ यह वीभत्स कृत्य कर रही थी और कह रही थी कि इसकी हालत ऐसी कर दो कि यह शर्म से मर जाए। लेकिन सोनी ने हार नहीं मानी और दोगुने ताकत के साथ मुकाबला जारी रखा।

सोनी ने कहा कि उनकी आवाज़ आज दिल्ली में सुनी जा रही है, लेकिन हज़ारों लोग अपनी प्रताड़ना को बस झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने बीते 14 सितम्बर को दंतेवाड़ा में एक बच्ची के साथ बलात्कार किया और पुलिस ने पीड़ित बच्ची की सहायता करने की बजाय उसे और प्रताड़ित किया।

इस मौके पर सोनी सोरी ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पकड़े गए सामाजिक कार्यकर्ताओं का ज़िक्र भी किया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की आवाज़ उठाने के कारण ही इन लोगों पर कार्रवाई की जा रही है।

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