कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

भारतीय लोकतंत्र के भविष्य को लेकर हो रही चिंता: जम्मू-कश्मीर मामले में भारत सरकार के ख़िलाफ़ उतरे शाहीदुल खान, अनुराधा राय और 249 बुद्धिजीवी

'हम इस बात से भी चिंतित हैं कि भारत सरकार असहमति के आवाज़ों को बंद करा रही है तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है.'

जम्मू कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जे को निरस्त किए जाने के विरोध में दक्षिण एशिया के 250 से ज्यादा बुद्धिजीवियों ने भारत सरकार की आलोचना की है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में सूचना तंत्र को ध्वस्त और आम जनजीवन के बुरी तरह प्रभावित करने के मोदी सरकार के फ़ैसले का विरोध किया है. एक पत्र लिखकर इन बुद्धिजीवियों ने मांग की है कि प्रदेश में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल की जाए, जिससे वहां रहने वाले लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा हो सके. पूरा पत्र यहां पढ़ें:

हम दक्षिण एशिया के नागरिक और दक्षिण एशियाई देशों के मित्र आज़ादी पसंद जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ खड़े हैं.

जम्मू कश्मीर में हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से हमें बड़ी चिंता हुई है. हम परेशान हैं कि जम्मू कश्मीर के लोग, जो दशकों से हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे हैं, उनसे पिछले 10 दिनों से उनका हक़ छीन लिया गया है.

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर की जनता और भारत सरकार के बीच एक ऐतिहासिक विश्वसनीयता का प्रतीक था. 5 अगस्त 2019 को ना सिर्फ अनुच्छेद 370 को निरस्त किया गया, बल्कि जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा छिनकर एक केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया. जिस तरह से जम्मू कश्मीर विधानसभा की राय के बिना इस फ़ैसले को लागू किया गया है, वह जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ धोखा है. यह एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का पूरी तरह से उल्लंघन है और सरकार के इस फ़ैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी जानी चाहिए.

हम जम्मू कश्मीर में नागरिकों की स्वतंत्रता पर हुए हमले की निंदा करते हैं. जम्मू-कश्मीर में दूरसंचार और इंटरनेट सेवा को बाधित किया गया है, मीडिया पर प्रतिबंध लगाया गया है और आंदोलन करने की स्वतंत्रता छीनी गई है. ये सभी फ़ैसले अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का पूरी तरह से उल्लंघन हैं. इसके साथ ही यह फ़ैसला नागरिक और राजनीतिक अधिकार के अंतरराष्ट्रीय करार (आईसीसीपीआर) का उल्लंघन है, जिसपर भारत ने 1979 में हस्ताक्षर किए थे.

हम कुछ मीडिया रिपोर्टों से चिंतित हैं, जिसमें बताया गया है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोगों के ऊपर गोलियां चलाई हैं और अधिकारियों ने इस घटना से इनकार कर दिया है. हम इस बात से भी चिंतित हैं कि भारत सरकार असहमति के आवाज़ों को बंद करा रही है तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराया जा रहा है.

भारत सरकार की यह कार्रवाई दिखाती है कि उसके भीतर संविधान, धर्म निरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना नहीं है. यह भारत के लोगों के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि भारत दशकों से लोकतांत्रिक तरीके से चलता रहा है. हमें भारतीय लोकतंत्र के भविष्य को लेकर चिंता है.

हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि वह जम्मू कश्मीर में चल रहे अमानवीय प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से खत्म करे. इसके साथ ही सरकार वहां जल्द से जल्द नागरिक स्वतंत्रता और सूचनाओं के प्रवाह को बहाल करे. राजनीतिक बंदियों को जल्द से जल्द रिहा करे तथा जम्म कश्मीर के लोगों के साथ संवाद स्थापित करे.

अगस्त के इस महीने में आज जब हम ब्रिटिश शासकों से आजादी का जश्न मना रहे हैं, हम इस निरंकुश शासन द्वारा जम्मू-कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंधों की निंदा करते हैं. हम जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ-साथ भारत और दक्षिण एशिया के उन तमाम लोगों के साथ खड़े हैं, जो शांति, समृद्धि और मौलिक स्वतंत्रता की इच्छा रखते हैं.

हस्ताक्षर:
1. ए एस पन्नीरसेल्वम, पत्रकार, चेन्नई
2. आसमा नईम, बाल्टिमोर म्यूजियम ऑफ आर्ट, मैरीलैंड
3. आमीना अहमद, शिक्षक, कैलिफोर्निया
4. अब्दुल हमीद नैय्यर, सेवानिवृत्त, क़ायदे आजम विश्वविद्यालय, इस्लामाबाद
5. अभिनीत खन्ना, स्वतंत्र कला प्रबंधक, मुंबई
6. अदिति अधिकारी, शोधकर्ता, काठमांडू
7. आफ़ताब अहमद, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क
8. अजय भारद्वाज, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया
9. अजय स्कारिया, यूनिवर्सिटी ऑफ मिन्नेसोटा
10. अकील बिल्ग्रामी, कोलंबिया यूनिवर्सिटी
11. अखिला एल. अनंत, लॉस एंजिलिस
12. एलन हिल, मेलबॉर्न
13. एलेक्स मबान्ता, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया
14. एलिसिया विरानी, लॉस एंजिलिस
15. आलोक अधिकारी, फिल्म संपादक, काठमांडू
16. अमर सिंह, कैलिफ़ोर्निया
17. अम्बिका मलिक, दिल्ली
18. अमीर फ़ायज, अटॉर्नी, श्रीलंका
19. अनहिता मुखर्जी, स्वतंत्र पत्रकार, सैन फ़्रांसिस्को
20. अनसूया सेनगुप्ता, कवि, बेंगलुरु
21. एंड्रयू ब्रांडेल, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी
22. एंजना चटर्जी, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया
23. एनिया लूम्बा, यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्नसिल्वानिया
24. अनिता पोट्टमकुलम, चेन्नई
25. अंजली आरोंदकर, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया
26. अंजली मोन्टेरियो, फिल्ममेकर, मुंबई
27. अन्ने मुर्फी, कनाडा
28. अन्नेमारी डी सिल्वा,शोधार्थी, कोलम्बो
29. अन्नू पलाकून्नाथू मैथ्यू, प्रोफेसर, यूएसए
30. अनु मोहम्मद, प्रोफेसर, जहांगीरनगर विश्वविद्यालय, ढाका
31. अनुराधा रॉय, प्रोफेसर, जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता
32. अनुरति श्रीवास्तव, डिजाइनर, दिल्ली
33. अनुशेष अनादिल, संगीतकार, ढाका
34. अनुष्का मीनाक्षी, फिल्मकार, पुद्दुचेरी
35. एरि लरिस्सा हेनरीच, प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया
36. आर्निको पांडेय, वैज्ञानिक, काठमांडू
37. अर्पणा पाण्डेय, अंतरराष्ट्रीय विकास कार्यकर्ता, फीनलैंड
38. आर्थुर लेनमैन, प्रोफेसर, हार्वर्ड विश्वविद्यालय
39.अरूप राठी, कवि, ढाका
40. असंदा बेन्या, यूनिवर्सिटी ऑफ केपटाउन, दक्षिण अफ्रीका
41.आस्ट्रीड हूप्स, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न केप, केपटाउन
42. आयशा जलाल, तुफ़्तश यूनिवर्सिटी, मेसाच्यूएट्स
43. आयुषा श्रेष्ठ, नेपाल
44. अज़हर सलेहा, टोरंटो
45. अज़ीज फ़ातिमा हसनैन, महासचिव, सेंटर फॉर फिजिक्स एजुकेशन, कराची
46. बलबिंदर सिंह भोगाल, होफ्सत्रा विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क
47. बसीर नवीद, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद, हॉन्ग कॉन्ग
48. बीना सरवर, पत्रकार, कराची
49. बेंजामिन फिल्डियर, वैज्ञानिक, पेरिस
50. भास्कर सरकार, प्रोफेसर ऑफ फिल्म एंड मीडिया स्टडीज, यूसी संटा बरबरा
51. भवानी फोनसेका, सीनियर रिसर्चर, कोलंबो
52. भूपिन्दर सिंह जुनेजा, डॉक्टोरल स्टूडेंट
53. कैनडास फुजिकेन, एसोशिएट प्रोफेसर ऑफ इंग्लिश, यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई
54. कारमोडी ग्रे, प्रोफेसर, दुर्हम यूनिवर्सिटी
55. कैरोला लोरिया, सिंगापुर
56. कैथरीन निल्सन, फोटोग्राफर, मेलबर्न
57. कैथरीन मसूद, फिल्ममेकर, सलेम
58. कैथी गेरे, यूसी सैन डियागो
59. चंद्र तलपड़े मोहन्ती, न्यूयॉर्क
60. चियारा लेतिजिया, प्रोफेसर, मोनट्रियल  इत्यादि.

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