कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

एसएससी की मार: परीक्षा पास करने के बाद भी नहीं हुई ज्वाइनिंग, अवसाद में आकर सुमित ने मौत को गले लगाया

एसएससी की परीक्षा पास करने के लंबे समय बाद भी नियुक्ति पत्र नहीं मिलने के कारण सुमित अवसाद की स्थिति में चले गए थे।

जनता के सवाल:

 

  1.  रोज़गार के मुद्दे पर फेल भाजपा सरकार क्या युवायों के लिए कुछ ठोस क़दम उठाने में सक्षम है?
  2.  सरकारी नौकरियों के इंतजार में कब तक सब्र रखेंगे देश के नौजवान?
  3.  सुमित की मौत का जिम्मेदार कौन-1. एसएससी 2. मोदी सरकार

रोजगार के मुद्दे पर केंद्र की सत्ता में आई बीजेपी अब फेल साबित हो रही है। इसका असर यह हो रहा है कि लंबे समय तक सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले युवा सफलता मिलने के बाद भी अवसाद के कारण मौत को गले लगाने पर मजबूर हो रहे हैं।

मौजूदा वाकया झारखंड के गिरिडीह ज़िले का है। यहां 29 वर्षीय सुमित कुमार कंधवे ने बीते बुधवार को आत्महत्या कर ली। सुमित लंबे समय से मानसिक अवसाद से ग्रसित थे। हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण के मुताबिक सुमित के परिवार वालों का कहना है कि एसएससी की परीक्षा पास करने के लंबे समय बाद भी नियुक्ति पत्र नहीं मिलने के कारण सुमित अवसाद की स्थिति में चले गए थे।

बताया जाता है कि सुमित ने लंबे समय तक दिल्ली में रह कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की थी। कड़ी मेहनत के बाद साल 2017 में आखिरकार उसका चयन एसएससी में हुआ। इसके बाद सुमित काफी उत्साहित रहने लगे थे। कुछ महीने पहले उन्हें चेन्नई में नौकरी करने के लिए जल्द ही नियुक्ति पत्र देने की बात कही गई थी। लेकिन, लंबा समय बीत जाने के बाद भी एसएससी द्वारा नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

इधर, सुमित के कुछ दोस्तों की बहाली हो चुकी थी, जिसके कारण वह काफी अकेला और अवसादग्रस्त रहने लगा था। इसी वजह से पिछले कुछ महीनों से उसने लोगों से मिलना जुलना भी काफी कम कर दिया था।

बुधवार की सुबह इस हादसे के बाद सुमित के परिजनों में सरकार और एसएससी के प्रति काफी आक्रोश है। इधर ट्विटर पर भी लोगों का ग़ुस्सा सरकार एवं प्रशासनिक उदासीनता पर उमड़ता हुआ दिखा।

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