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स्टार्टअप इंडिया ‘सीमित’ स्टार्टअप: अधिकतर नए उद्यमियों को नहीं मिल रहा लाभ

लोकलसर्किल नाम के एक सामुदायिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ने देश में 15,000 से अधिक स्टार्ट-अप, एसएमई और उद्यमियों के बीच सर्वेक्षण किया.

केंद्र की मोदी सरकार की स्टार्टअप इंडिया की पोल खुल गई है. एक रिपोर्ट के अनुसार इसका लाभ सिर्फ 18% स्टार्टअप को मिला रहा है. लोकल सर्किल्स वार्षिक स्टार्टअप सर्वेक्षण 2019 की रिपोर्ट से यह बात सामने आई है.

एबीपी न्यूज़ के अनुसार, लोकलसर्किल नाम के एक सामुदायिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ने देश में 15,000 से अधिक स्टार्ट-अप, एसएमई और उद्यमियों के बीच सर्वेक्षण किया.

अप्रैल 2018 में जारी एक अधिसूचना में, सरकार ने आदेश दिया था कि 10 करोड़ रुपये तक के निवेशकों से धन समेत कुल निवेश वाले स्टार्टअप, आयकर कानून की धारा 56 के तहत कर से छूट के लिए आठ सदस्यीय सरकारी बोर्ड से अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं. इस तंत्र को तथाकथित एंगल टैक्स से छूट प्राप्त करने के लिए रखा गया था.

सर्वेक्षण के अनुसार, “एंजेल टैक्स ने इस वर्ष कई एसएमई और स्टार्ट-अप आयकर नोटिस प्राप्त करने वाले उद्यमी के जीवन को आसान नहीं बनाया है।” सर्वेक्षण में साल 2019 को लेकर 71 फीसदी स्टार्टअप के संस्थापक ने कहा कि वे अपने संगठन को आगे बढ़ाएंगे, जबकि 24 फीसदी ने कहा कि वे अपना स्टार्टअप बंद कर देंगे, जबकि 5 फीसदी ने कहा कि वे अपना स्टार्टअप बेच देंगे.

इकॉनोमिक टाइम्स के मुताबिक, इसके अलावा इस सर्वेक्षण में स्टार्टअप पर लगने वाले ‘एंजेल टैक्स’ मुद्दे पर भी चर्चा की गई, जिसमें 32 फीसदी स्टार्टअप्स ने बताया कि साल 2018 में इस संबंध में उन्हें आयकर विभाग से कई नोटिस मिले. जबकि 6 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें एक नोटिस मिला है. 62 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है,

वहीं कई स्टार्टअप संस्थापकों ने सोशल मीडिया पर नोटिस के ख़िलाफ़ आवाज उठाई, सरकार ने आयकर विभाग से कहा कि वह बकाया एंजेल-टैक्स बकाया वसूलने के लिए जबरदस्ती न करें. हालांकि, कई एसएमई संस्थापकों ने सर्वेक्षणकर्ताओं को बताया कि सरकारी आदेशों के बावजूद स्टार्ट-अप के ख़िलाफ़ मूल्यांकन आदेश जारी करना जारी रहा.

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