कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बर्ख़ास्त जवान तेज बहादुर का साजिशन रद्द किया गया पर्चा, स्टिंग में EC पर्यवेक्षक का क़बूलनामा

चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक सीधे तौर पर क़बूल किया है कि तेज बहादुर का पर्चा खारिज करने के लिए लगभग 48 घंटे तक वज़ह ढूंढते रह गए थे.

वाराणसी लोकसभा सीट से पूर्व सैनिक तेज बहादुर यादव के चुनाव लड़ने को लेकर पर्चा खारिज़ करने के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. एक निजी न्यूज़ चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में यह साफ़ हो गया है कि पूर्व जवान की उम्मीदवारी साजिशन रद्द की गई है. छिपे कैमरे में चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक सीधे तौर पर क़बूल कर रहे हैं कि लगभग 48 घंटे तक तेज बहादुर का पर्चा खारिज करने के लिए वज़ह ढूंढते रह गए थे.

दरअसल, एबीपी न्यूज़ की टीम ने यह स्टिंग किया है. स्टिंग में चुनाव आयोग के पर्यवेक्षकर के. प्रवीण बोलते नज़र आ रहे हैं, “48 घंटे तक ने हमने इसमें पहले नॉमिनेशन और दूसरे नॉमिशेन के बीचे के गैप को देखा, सारे रूल को देखा. इतना से निग्लेक्ट कुछ भी नहीं. मैंने कलेक्टर और रिटनिंग ऑफिसर से बात की. वकील और इलेक्शन कमिशन सबसे जानकारी ले ली. सब यही 33/3 तुम लोग कैन फैसला लेने को बोलता. जब धारा 33/3 है, तब आप क्या उम्मीद करें. आप नहीं कर सकते.”

बता दें कि इससे पहले तेज बहादुर के वकील ने भी आरोप लगाया था कि पहले भी पर्यवेक्षक ने कलेक्टर को कहा था कि यादव का पर्चा खारिज करना है. अब इस स्टिंग से बहुत कुछ साफ़ हो गया है.

लोगों के एक समूह का मानना था कि यह मुक़ाबला असली बनाम नकली चौकीदार का था. इसलिए बीजेपी ने डर से तेज़ बहादूर का पर्चा ही खारिज करा दिया. खुद तेज बहादुर ने भी कहा था कि उन्हें जानबूझकर चुनाव लड़ने नहीं दिया जा रहा है.

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