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सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से मांगा जवाब: भीड़ हिंसा को रोकने के लिए जारी दिशानिर्देश क्यों नहीं किए लागू

उच्चतम न्यायालय ने गृह मंत्रालय और 11 राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है.

उच्चतम न्यायालय ने बीते शुक्रवार को भीड़ हिंसा को लेकर एक बार फिर राज्य सरकारों के साथ केंद्र को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस उन दिशानिर्देशों को ठीक से लागू नहीं करने को लेकर है जिसे उच्चतम न्यायालय ने भीड़ की हिंसा को रोकने के लिए जारी किया था.

लाइव लॉ की ख़बर के अनुसार मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने एंटी-करप्शन काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट नामक संगठन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए गृह मंत्रालय और 11 राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है.

दरअसल, संगठन ने याचिका में भीड़ हिंसा पर रोक लगाने के लिए 2018 के दिशानिर्देशों को ठीक तरह से लागू करने की मांग की थी.

ट्रस्ट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अनुकुल चंद्र प्रधान ने कहा, “लिंचिंग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है. जबकि अदालत के आदेश का उद्देश्य भीड़ हिंसा के खतरे से निपटना था.”

ट्रस्ट ने कहा कि अदालत ने गोरक्षा के नाम पर हुई हत्याओं को लेकर प्रिवेंटिव (निवारक), रेमिडियल (उपचारात्मक) और प्यूनिटिव (दंडनीय) दिशानिर्देश जारी किए थे, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया है.

बता दें कि न्यायालय ने पिछले साल भीड़ हिंसा रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे. अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि “भीड़तंत्र के भयानक कृत्यों” कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते. लोकतंत्र में ‘भीड़तंत्र’ की इजाजत नहीं दी जा सकती है. न्यायालय ने का था कि संसद से भीड़ हिंसा को रोकने के लिए नया और सख्त कानून बनाना चाहिए.

अदालत ने राज्यों को सख्त आदेश देते हुए कहा था कि राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखें और संविधान के मुताबिक काम करें.

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