कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

रफाल पर फिर सुनेगा सुप्रीम कोर्ट, इमरान ने कहा- पाक के लिए BJP है पाक, क्या भाजपा और इमरान ख़ान के बीच चल रही है कोई साजिश? : रवीश कुमार

पाकिस्तान बीजेपी की जीत का बेसब्री से रास्ता देख रहा है. वो क्यों देख रहा है? क्या बीजेपी और इमरान ख़ान के बीच कोई साज़िश है?

यह कुतर्क बीजेपी ने बोया कि पाकिस्तान ने किसी भारतीय की तारीफ़ की तो वह पाकिस्तान का समर्थन हो गया. इस कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी कांग्रेस के घोषणा पत्र को पड़ोसी देश साज़िश बताने लगे. कहने लगे कि कांग्रेस जीत गई तो पाकिस्तान में लड्डू बंटेंगे. आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि अगर शांति वार्ता को बेहतर मौका मिलेगा तभी जब बीजेपी जीतेगी.

तो क्या यह माना जाए कि पाकिस्तान बीजेपी की जीत का बेसब्री से रास्ता देख रहा है. वो क्यों देख रहा है? क्या बीजेपी और इमरान ख़ान के बीच कोई साज़िश है? सोचिए, अगर इमरान ख़ान ने राहुल गांधी की तारीफ़ की होती तो पूरी बीजेपी सड़क पर आ गई होगी और प्रधानमंत्री मोदी पूरी रैली इसी पर कर रहे होते.

पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान दिवस पर दिल्ली में भारतीय मेहमान आमंत्रित थे. उन्हें दूतावास में जाने से रोकने के लिए सरकारी अधिकारी तैनात किए गए और टीवी चैनलों के पत्रकार. यह ड्रामा चल ही रहा था कि इमरान ख़ान ने यह सूचना सार्वजनिक कर दी कि मोदी ने पाकिस्तान को बधाई संदेश भेजा है. ऐसे पत्र चुपके से नहीं भेजे जाते. हिन्दी के अखबार और चैनल ने ऐसी सूचनाओं को दबाने का काम किया. विपक्ष में दम नहीं था कि वह अपनी तरफ से लोगों के बीच पहुंचा दे.

पत्रकार अजय शुक्ला ने लिखा है कि आज रफाल सौदे के चार साल हो गए. चार साल में एक विमान नहीं आया है. न ही भारत में एक भी रफाल बना है. एन राम के ख़ुलासे पर सरकार ने जांच बिठाने से इनकार कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक ऐसा फ़ैसला दिया है जिसे लेकर मीडिया चुप ही रहेगा ताकि गांव गांव तक यह बात न फैले. आप जानते हैं कि द हिन्दू में रफाल विमान पर कई खोजी रिपोर्ट छपी थी जिससे साबित हो रहा था कि रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को अंधेरे में रखकर प्रधानमंत्री कार्यालय अपनी तरफ से डील कर रहा था. द हिन्दू के एन राम ने बक़ायदा काग़ज़ के साथ रिपोर्ट छापी थी.

इसे लेकर प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए कि अदालत पूर्व के फ़ैसले की समीक्षा करे, क्योंकि उसके सामने सारे तथ्य
नहीं रखे गए. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस केस को फिर से सुनेगी जिसके फ़ैसले की मार्केटिंग मोदी एंड मीडिया सरकार की जीत के तौर पर कर रहे थे.

चीफ़ जस्टिस ने सरकार के दावे को ख़ारिज कर दिया कि रफाल से संबंधित जो दस्तावेज़ सार्वजनिक हुए हैं, वे साज़िश का हिस्सा हैं. अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा था कि रफाल के दस्तावेज़ चोरी चले गए थे जो साक्ष्य नहीं माने जा सकते. अदालत ने सरकार की बेतुकी दलील ठुकरा दी है.

कांग्रेस उम्मीदवार कीर्ति आज़ाद और आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ट्वीटर पर मीडिया को चुनौती दे रहे हैं कि क्या मीडिया मोदी के लिए इन दो बड़ी ख़बरों को दबा देगा? मेरी राय में मीडिया मोदी का मैनेजर है. मीडिया के मालिक सीनियर मैनेजर हैं और संपादक जूनियर मैनेजर हैं.

सभी विपक्षी दलों को मिलकर मीडिया के बारे में आज न कल तय करना होगा. राजद नेता तेजस्वी यादव ने ठीक प्रस्ताव दिया था कि फ़र्ज़ी डिबेट के कार्यक्रम में विपक्ष अपना प्रवक्ता न भेजे. मगर कांग्रेस अपना प्रवक्ता उन्हीं डिबेट में भेजती रही जहां न्याय पर चर्चा न करने के सौ बहाने खोज लिए गए थे. मेरी अब भी राय है कि विपक्ष चैनलों का बहिष्कार करें और आम लोग सभी चैनलों को देखना बंद करें. सभी का मतलब सौ प्रतिशत.

मीडिया और न्यूज एंकर भारत के लोकतंत्र की रोज़ हत्या कर रहे हैं. लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने वाला विपक्ष कैसे हत्या के उन कार्यक्रमों में अपना प्रवक्ता भेज रहा है. वह जनता के बीच रैलियों में क्यों नहीं बता रहा है कि मीडिया क्या कर रहा है. इस मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का शुक्रिया. वे अपनी हर रैली में टीवी न देखने की मेरी अपील का ज़िक्र करते हैं और लोगों को आगाह करते हैं. यही काम सभी विपक्षी नेता को करना चाहिए.

अब भी मौका है विपक्ष एक बार सोचे. उसके एक क़दम से डिबेट के कार्यक्रम बंद हो जाएंगे और गोदी मीडिया के एंकरों को अपना स्लाट यानी शो पूरा करने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी. यह ध्यान रहे कि बीजेपी ने दो साल से मेरा बहिष्कार किया है.

(यह लेख वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के फ़ेसबुक पोस्ट से शब्दश: लिया गया है.)

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