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मुझे हाउस पैनल इंक्वायरी से न्याय की उम्मीद नहीं दिख रही थी: CJI यौन उत्पीड़न केस में सुनवाई से महिला ने खुद को किया अलग

"मुझसे बार-बार पैनल द्वारा यह पूछा गया कि मैंने इतनी देर से यौन उत्पीड़न की शिकायत क्यों की."

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का शिकायत करने वाली महिला ने मंगलवार को इन हाउस इंक्वायरी पैनल की सुनवाई में भाग लेने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट में जूनियर सहायिका के तौर पर काम करने वाली महिला ने आरोप लगाए कि यह इंक्वायरी पैनल मेरे द्वारा पेश किए गए तथ्यों और सबूतों को सही ढंग से नहीं ले रही थी. यह सीजेआई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न का विशेष केस था इसे सामान्य केस के तरह ट्रीट नहीं किया जाना चाहिए था. पैनल को इस केस को विशाखा गाइडलाइन्स के तहत देखना चाहिए था जो नहीं किया गया. मुझे इस पैनल से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही थी.

बता दें कि इस मामले के लिए जस्टिस एसए बोबड़े की अध्‍यक्षता वाले तीन सदस्‍यीय पैनल का गठन किया गया है. इस मामले में 26 अप्रैल और 29 अप्रैल को पैनल की सुनवाई भी हुई थी. लेकिन महिला का आरोप है कि उसे पैनल में अपनी बात रखने के लिए वकील तक नहीं रखने दिया गया.

महिला ने आगे कहा कि, “मुझे सुनने में परेशानी आती है. मैं इन दिनों काफ़ी परेशानी से गुजर रही हूं. मुझे पिछली सुनवाइयों के द्वारा खुद के दिए स्टेट्मेंट भी नहीं याद रहते इसलिए मैंने पैनल से अनुरोध की थी कि वो सुनवाई का विडियो रिकॉर्डिंग करवाए ताकि आगे की सुनवाइयों में मुझे मदद मिले. लेकिन पैनल ने मेरे अनुरोध को खारिज कर दिया. मुझे पिछली सुनवाइयों में खुद के दिए गए बयानों की कॉपी नहीं दी गई.”

महिला ने आगे कहा कि “सुप्रीम कोर्ट के तीन जज के लगातार पूछताछ करने और मेरे साथ वकील नहीं होने के कारण मैं काफ़ी घबरा गई थी. मैंने कई बार पैनल के सामने यह अपील की कि मेरे पक्ष को मेरे वकील के द्वारा पैनल के सामने रखने दिया जाए लेकिन मेरी मांग को ठुकरा दिया गया.”

महिला ने कहा कि “मुझे इस पैनल से बहुत उम्मीद थी कि मुझे और मेरे परिवार को इंसाफ़ मिलेगा, इसलिए मैंने पिछले दोनों सुनवाइयों में हिस्सा लिया. लेकिन मेरे द्वारा पेश किए गए तथ्यों को सही ढंग से नहीं लिया गया. पैनल के जज यह पूछते रहे कि यौन उत्पीड़न का केस इतनी देर से क्यों दर्ज करवाया. जबकि मैं इस बात का खुलासा मीडिया के सामने कर चुकी हूं.”

महिला ने बताया कि “ऐसी परिस्थिति में, मैं 30 अप्रैल को एक लिखित पत्र के साथ सुनवाई के लिए गई, जहां मैंने एक बार फिर से बताया कि मैंने कई महीनों के बाद यौन उत्पीड़न की अपनी शिकायत क्यों की. इसके साथ ही मैंने यह भी बताया कि मेरे वकील के बिना कार्यवाही में भाग लेना मेरे लिए बहुत दर्दनाक और कठिन क्यों था. मैंने यह भी कहा कि मुझे सुनवाई के पहले की दो तारीखों में दर्ज अपने बयान की प्रति नहीं दी गई है.”

महिला ने बिंदूवार ढंग से प्रेस विज्ञप्ति में अपनी बात रखते हुए कहा कि-

1. मेरी परेशानी और घबराहट को देखते हुए भी वकील को लाने की अनुमति नहीं दी गई.

2.कार्रवाही का विडियो रिकॉर्डिंग नहीं कराया गया

3. तमाम अनुरोध के बावजूद पिछली सुनवाइयों 26 अप्रैल और 29 अप्रैल को अपने दिए वक्तव्य की कॉपी नहीं दी गई ताकि मुझे आगे मदद मिल सके.

4.मुझे इस समिति की प्रक्रिया के बारे में सूचित नहीं किया गया था

महिला ने कहा कि मुझे लगा कि मुझे इस समिति से न्याय मिलने की संभावना नहीं है और इसलिए मैं अब 3 न्यायाधीशों की समिति की कार्यवाही में भाग नहीं ले रही हूं.

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